ad

काव्य : योग - नीता गुप्ता, रायपुर


 

काव्य : 

 योग

प्रातः उठ नित्य करो योग,

होकर प्रसन्ना भोगोगे सुख भोग ,,

भागेंगे सारे तन से रोग,

तंदरुस्त कहेंगे तुम्हें लोग।।


 ऋषि मुनियों की थी यह शक्ति,

 करी थी उन्होंने योग की भक्ति,

 थी उनमें अद्भुत आसक्ति,

 नहीं की उन्होंने योग से विरक्ति।।


बच्चों से भी कराए योग प्रयास ,

जगती योग से स्पूर्ति  एहसास ,

होता उनका संपूर्ण विकास,

फैलाते चारों ओर अपना प्रकाश।।


योग जीने का सुरक्षित आयाम,

करो तुम नित प्राणायाम,

करता योग बाम का काम ,

बीमारी भागे पल में तमाम ।।


योग बनाता स्वस्थ तन,

होता इससे पुलकित मन,

योग बसे जब तन और मन,

नहीं फैलाता रोग तब फन।


अनुलोम विलोम भ्रामरी करते नित,

स्वास्थ्य सदा फलदायक रहता उनके हित,

विचसित नहीं होता है चित्त

नहीं भड़कता कभी उनका पित्त।।


बनाओ योग जीवन आधार ,

तभी घटेगा तन का भार,

यह है एक लाभदायक उपचार,

इसलिए करो सब योग का प्रचार।।

 - नीता गुप्ता,

रायपुर छत्तीसगढ़ 


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post