काव्य :
स्वतंत्रता-भोर
बहुत कठिन संग्राम से,
मिली स्वतंत्रता-भोर।
शतक छह बना ले गये,
सभी लुटेरे चोर।
सभी लुटेरे चोर,
सभी मौसेरे भाई।
अब भी बनी कुदृष्टि,
टोह में बिल्ली ताई।
दीमक तिलचट्टे सब,
मांग रहे आरक्षण।
करो देश के प्रहरी,
जाग्रत रहकर रक्षण!
-डाॅ. सुधा कुमारी
नई दिल्ली
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