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सावन के गीतों गजलों और कविताओं से सजी काव्य चौपाल



सावन के गीतों गजलों और कविताओं से सजी काव्य चौपाल 

भोपाल । अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई की जून मास की काव्य चौपाल की बैठक, दिनांक 27 जून,2026  को  आयोजित की  गई। 
मानसून जब शहर में प्रवेश कर चुका है और शहर का पोर पोर बारिश की बूंदों से भीग रहा है तब काव्य चौपाल अपने तय समय से सभी सदस्यों के कविता रस में डूबते-उतराते बेहद खुशगवार माहौल में संपन्न हुआ।
वैसे यह काव्य चौपाल की अत्यंत खास बैठक भी थी क्योंकि संगठन  की वरिष्ठ और महत्वपूर्ण सदस्य मधुलिका सक्सेना मधुआलोक  जी के जन्मदिन का अवसर भी था। इस सुअवसर पर  गोष्ठी में कविताएं और गीत अपनी विविध रंगों की खुशबू बिखेर रहे थे । एक लेखक के लिए शुभकामनाओं की सुन्दर माला के रूप में सजी कविताओं से बढ़ कर शायद ही कोई जन्मदिन का उपहार हो सकता है! अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी के आवास पर कल एकत्रित कवि-कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के पाठ  से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। 
कार्यक्रम की शुरूआत मधुलिका सक्सेना मधुआलोक  जी के सावन गीत से हुई। शास्त्रीय धुन पर आधारित इस गीत को गाकर कवयित्री ने काव्य चौपाल की मधुर शुरुआत की। बेहद कर्णप्रिय इस सावन गीत ने कार्यक्रम को आत्मीय आगाज दिया।
“मनभावन सरसावन सावन 
आयो री आली आयो री”
अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी ने सावन की एक बेहतरीन कविता सुनाई। कविता ऐसी थी कि सावन की मधुरता तो थी पर इंतजार के अहसास की कई लकीरें बूंदों के इर्द-गिर्द खींची हुई थीं। 
“अब के सावन में यूं टूट कर बरसा पानी 
अब के मुलाकात अधूरी सी लगी 
अब के सावन भी करिश्माई लगा 
एक कसक बो गया जाते-जाते”
संस्था की मध्य प्रदेश इकाई की अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव जी ने एक बेहतरीन गीत की प्रस्तुति दी। सावन की ऐसी संगीतमय कविता पर सभी  झूम उठे तो कविता के मौसम में सावन की घटा बिखरनी ही थीं।
“सावन का त्यौहार,
झूला पड गये अंबुवा की डार ।
सखियाँ गाये गीत मल्हार ,
आया सावन का त्यौहार ।
मेघा गरजे बूँदिया बरसे ,
इंद्रधनुष को रही निहार  ।
अंकुर फूटे मनवा नाचे ,
पेड़ों में आ गयी बहार ।
आया सावन का त्योहार “
वरिष्ठ कवयित्री जया आर्य जी ने प्रेम की कविता सुना कर और एक सुंदर मधुर सुरीला गीत सुना कर सबका मन हर बार की तरह जीता।
“भौंरा कैसे न  उलझता, भौंरा कैसे न बहकता 
मन कैसे न उलझता, मन कैसे न बहकता”
अपनी ग़ज़ल में  संस्था के महासचिव मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी जी ने सावन की बारिश को एक उम्मीद बताया। इस खुशगवार मौसम में हर रंग खूबसूरत हो, उनकी ग़ज़ल ने ऐसे ही मौसम की कामना की।
“सावन आया, भीगता हर इक नगर है दोस्तो
हर तरफ खुशबू का फैला सा सफर है दोस्तो।
तेरी यादों की घटा, जब दिल पे छा जाती है यूँ 
क्या कहें, रंग हर ख़ुशी का, बेअसर है दोस्तो।
काश कि इन बारिशों में दिल भी धुल जाएँ सभी, 
दस्तरस  में नफरतों की, इक उम्मीद भर है दोस्तो।”
 शायरा और कवयित्री रेनू श्रीवास्तव जी ने भावों में डूबी कविता सभी के हृदय तल तक पहुंच रही थी ।  यह कटु सच है कि उन मासूम समय की सहजता को , उस जीवन शैली को हम सभी ढूंढ रहे हैं जो पीछे छूटता सा जान पड़ रहा है। वो  सरल सा समय का दौर हम सभी को बेहतर याद आता है जिसे हम बस कुछ पहले तक जी रहे थे।
“वो मेरे घर का था सामान 
जिससे घर की थी पहचान
हम उसको ढूंढ रहे हैं।”
 कवयित्री  रानी सुमिता ने बारिश के अभूतपूर्ण सौंदर्य में डूबे कवि हृदय को सुंदर शब्दों में साकार किया जिसे सभी ने खूब सराहा।
“मेरे शहर की बारिश!
थोड़ा ठहरो 
अभी ताल में दूर तक गिरती  बिन्दुओं को 
देखना है इकटुक
अपने भींजते आँचल में भर-भर कर बूँदें 
 गीले पांव घर की ओर मुड़ना है मुझे 
रास्ते की गीली मिट्टी अपनी साड़ी के कोरों में लपेटे
टपकते बालों का गीला जूड़ा बांधे 
घर लौटने का मेरा अतिरेक 
तुम जानती हो!”
कवयित्री डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव जी ने सावन के प्रकृति चित्रण को अपने गायन में बेहतरीन तरीके से किया। सुरीले स्वर में प्रस्तुत इस कविता पर चौपाल में सभी झूम उठे।
“देखो सावन फिर से आया
पाहुन बन धरणी पर छाया”
 कवयित्री विनीता राहुरीकर जी ने  बरसती फुहारों के विभिन्न दृश्य रचे कि फुहार की बूंदें जब प्रकृति के विभिन्न अवयवों पर गिरती हैं तो कैसा अद्भुत वातावरण का संचार करती हैं। ऐसी कोमल सी कविता ने काव्य चौपाल की शोभा में चार चांद लगाये।
“बूँद-बूँद
बरसती है फुहार
एक धीमी मधुर रागिनी पर
डोल उठते हैं पत्ते और फूल
नदियाँ बल खाकर झूमने लगती हैं
फुहारें जब तन पर 
भँवर उठाने लगती हैं”
 कवयित्री कीर्ति सिंह जी ने मेनका के सौंदर्य को  उकेरती श्रृंगार रस में डूबी कविता का अविश्वसनीय दृश्य उपस्थित किया। विश्वामित्र ने किस तरह शब्दों में पिरोया होगा मेनका का रूप, इस विषय पर रची गई यह एक अलहदा रचना थी । 
“भौंरा कैसे न  उलझता, भौंरा कैसे न बहकता 
मन कैसे न उलझता, मन कैसे न बहकता “
 कार्यक्रम का सुगठित संचालन कर रही आरती शर्मा जी ने प्रेम की ठहराव से भरी कविता का सुंदर पाठ किया। 
“आज- कल दिन कुछ बे- ढंग से कट रहे हैं  
मानो जून का महीना दिसंबर की तरह कट रहा हो,  
बावजूद इसके  
इक्वेटर अभी हाल ही में होकर गुजरा है।  
कभी किसी सिटवेल ने कहा था  
"धरती का पहला प्रेमी सूरज है"।  
यक़ीनन यह भ्रम है  
पर सुलझाना कौन चाहता है इसे!! “ 
अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच का “काव्य चौपाल” कार्यक्रम  प्रत्येक मास की अपनी यात्रा पूरे जोश और उत्साह से तय करता रहा है। 
 अनवरत एक लंबी दूरी तय करते हुए इस वर्ष के जून मास की अपनी गोष्ठी में भी लेखकों, साहित्यकारों और सुधी श्रोताओं की उपस्थिति में एक सफल और लोकप्रिय कार्यक्रम की श्रेणी में अपना स्थान बनाये रखा। 

…रानी सुमिता
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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