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काव्य : मुझको देखो मैं युवा हूँ - डा.नीलम , अजमेर



काव्य : 

मुझको देखो मैं युवा हूँ

मुझको देखो 
मैं युवा हूँ
अपने भविष्य से
डरा हुआ हूँ
जिन जुमलों पर
नेताओं को चुना था
उन्हीं जुमलों और
नेताओं से ठगा
हुआ हूँ
मुझको देखो.........।

माँग हमारी
सत्ता तो नहीं है
महले-दो महला
आलीशान
जीवन तो नहीं है
नहीं हमारी माँग में
सारा आसमान
पर हमको
मिल जाए हमारे
थोड़ा-सा
हमारा आसमां
मगर सत्ता के ठेकेदारों
के हाथों छला हूँ
मुझको देखो........।

घर,जेवर,खेत
बेचकर शिक्षा हम
पाते हैं
तब कहीं जाकर
नौकरी के काबिल
खुद को पाते हैं
जाग-जागकर रात-
दिन पढ़ते 
भूख-प्यास सब भूला
कर भविष्य गढ़ने
का प्रयास करते हैं
मगर धन के
लोभी,स्वार्थी लोगों के
हाथों पिटा हूँ
मुझको देखो.......।

जागरूक फिर से
हुआ हूँ
भूख हड़ताल, अनशन
कर 
गाँधी-पथ पर 
चला हूँ
हको हुकूक के लिए
मरते दम तक लड़ता रहूँगा
है हौंसला सत्ता की
नींव हिलाने का
अपनी माँग मनवाकर
ही दम लूँगा
मुझको देखो.......।

    - डा.नीलम , अजमेर
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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