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काव्य : चौपाल का नया प्रभात -भारमल गर्ग "विलक्षण"सांचौर (राजस्थान)


काव्य : 

चौपाल का नया प्रभात 

धरती कहे चौपाल में आकर सभी चिन्तन करें
संसार के इस मोड़ पर मिलकर नया जीवन करें

बैठी सभा गंभीर है पर बात में ठहराव है
पहचान का संकट बड़ा गहरा हुआ अलगाव है
टूटी पुरानी रीत पर अब भी वही दुहराव है
दीवार के उस पार का सम्मुख नया दर्शन करें

कहते सभी हैं उम्र कम कच्चा अभी यह हाथ है
आँधी चले तो क्या करे जब दूर तक नभ साथ है
रोकी अगर परवाज़ तो यह व्यर्थ ही आघात है
उड़ने परिंदे के लिए मिलकर नया मन्थन करें

विज्ञान की इस राह पर फैला नया विस्तार हो
हल ढूँढ़ने हर मोड़ पर मेधा यहाँ तैयार हो
तकनीक की इस शक्ति से हर मोड़ का उद्धार हो
संसार के उत्थान का मिलकर नया सर्जन करें

आयु बड़ी होने से ही बनता नहीं आधार है
निष्ठा भरी सेवा रहे तो कर्म का सत्कार है
सीखे सदा झुककर वही जिस पर समय का प्यार है
उस चेतना के मान का मिलकर नया शोधन करें

सूखे पड़े सब खेत हैं पानी बिना व्याकुल डगर
बीमार बस्ती है यहाँ सहमा हुआ सारा नगर
रोज़ी बिना लाचार मन भटके इधर भटके उधर
पीड़ा मिटे जन-जन दुखी पावन नया अर्पण करें

दफ़्तर नियम साधन समझ आगे बढ़े आवाम अब
हर योजना से जुड़ सके पूरा करे हर काम अब
पहचान कर सब नीति को पाए सुखद अंजाम अब
संवाद की इस राह का मन से नया वन्दन करें

घर के बड़ों की छाँव तो पावन बड़ा वरदान हो
सच्ची युवा इस शक्ति का संयम भरा उत्थान हो
टकराव की बातें मिटें दोनों तरफ सम्मान हो
दोनों दिशा जब मिल गईं सुंदर नया संगम करें

नफ़रत मिटे हर मन खुले सब साथ हों इस राह में
साथी बढ़े आगे अगर आनंद हो हर चाह में
हाथों मिले जब हाथ तो मंज़िल मिले परवाह में
सद्भाव का विश्वास का दृढ़तर नया बन्धन करें

मेहनत करे कोई अगर पूरे नगर की शान हो
खिलते हुए हर खेत से हर झोपड़ी धनवान हो
आई नई जो रोशनी घर घर बने पहचान हो
इस जीत का इस मोड़ पर मिलकर नया उत्सव करें

गिरकर उठे फिर से लड़े संघर्ष से भागे नहीं
हर भूल से सीखे सदा मन में कभी हारे नहीं
संकोच तजकर यत्न से निंदा कभी लागे नहीं
तपकर निखरती धूप में पावन नया कुन्दन करें

कुर्सी मिली तो क्या हुआ सेवा बिना सम्मान क्या
निष्ठा नहीं मन में अगर सचमुच कहो इन्सान क्या
सद्भाव ही पहचान है पद का यहाँ अहसान क्या
निष्ठा भरी इस राह पर महके नया चन्दन करें

मिट जाए नश्वर नाम यह पर गूँजती आवाज़ हो
आने वली हर नस्ल को इस भूमि पर ही नाज़ हो
निष्काम सेवा भाव से बदले धरा का साज़ हो
संसार के इस बाग़ को खुशबू-भरा गुलशन करें

- भारमल गर्ग "विलक्षण"
सांचौर (राजस्थान)
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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