हिंदी पखवाड़े में इंटेक की काव्य गोष्ठी में कवियों ने बिखेरे रंग
अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाती है हिंदी ,कभी मुंबई तो कभी पुणे में ,पीटी जाती है हिंदी
कंकरखेड़ा, मेरठ । हिंदी भाषा पखवाड़े के उपलक्ष में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज
(इंटेक ) द्वारा आनंदम आश्रम श्रद्धापुरी में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष श्री आर के भटनागर, श्री ए के जौहरी,श्री तेजभान सक्सेना ,श्री संजय जैन सत्यम, श्रीमती मुक्ता शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलं कर किया गया । कोमल चौहान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । काव्य गोष्ठी का संचालन श्री संजय जैन सत्यम ने किया । कार्यक्रम का संचालन श्री ए के जौहरी ने किया । इस अवसर पर कविता पाठ करते हुए वरिष्ठ कवि अतिवीर जैन पराग ने महाराष्ट्र में हिंदी भाषी ऑटो चालकों के साथ हो रही मारपीट पर कहा ' अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाती है हिंदी , कभी मुंबई तो कभी पुणे में ,पीटी जाती है हिंदी । यूं तो रोजगार की राजभाषा है हिंदी, पर बेरोजगारी की भाषा बनी आज हिंदी । ' राम लखन पटेल ने पर्यावरण पर अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए कहा 'ताकि जिंदा रहे कल भी पर्यावरण, पेड़ पौधे जमीन पर लगाया करो, जब तलक है प्रकृति, तब तलक ही है हम ,बात सच है यह ,मत भूल जाया करो ' । संजय जैन सत्यम ने प्रेम के ऊपर अपनी रचना प्रस्तुत की ' प्रेम आंसुओं में बहे , भावनाओ में है कहे ,प्रेम तो उपासना है , मनो का यह मान है । प्रेम है सुभाष जी का, प्रेम है आजाद जी का ,प्रेम है पटेल जी का, देश की जो शान है '। कार्यक्रम में सौरव उपाध्याय ने गजल पढ़ी।श्री नरेंद्र कुमार त्यागी ,श्री राम अवतार त्यागी ,श्रीमती सरोज दुबे ने राधा कृष्ण पर तो श्रीमती मुक्ता शर्मा ने हिंदी पर ,कोमल चौहान, ,गौरव ने भी काव्य पाठ किया । कार्यक्रम के संयोजक श्री ए के जौहरी ने सभी का धन्यवाद दिया ।
इंजी. कवि अतिवीर जैन * पराग *
कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001
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साहित्यिक समाचार
