पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा पूर्व मुख्य मंत्री, उत्तराखंड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से सम्मान पत्र ग्रहण करते हुए सुरेश पटवा
भोपाल के लेखक सुरेश पटवा लेखक गाँव देहरादून में हुए सम्मानित हुए
भोपाल । अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच का 13 वां अधिवेशन दिनांक 26 सितंबर 2026 को देहरादून की वरिष्ठ साहित्यकार विद्या सिंह की अध्यक्षता में, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा पूर्व मुख्य मंत्री, उत्तराखंड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के मुख्य आतिथ्य, सुरेश पटवा और जया आनंद के विशिष्ट आतिथ्य में देहरादून के निकट सुरम्य धुंध भरी हिमालयी पहाड़ियों से घिरी थानों घाटी स्थित लेखक गांव में आयोजित किया गया। मंच की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव और प्रमिला वर्मा भी मंचासीन रहीं।
सर्वप्रथम सरस्वती वंदना उपरांत सम्मिलित साहित्यकारों के परिचय से सत्र आरम्भ हुआ। प्रमिला वर्मा ने विश्व मैत्री मंच की स्थापना और विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की।
विभिन्न साहित्यकारों सहित सुरेश पटवा ने अपनी “सृजन यात्रा” पर बोलते हुए कहा कि “उन्हें बचपन से किताबें पढ़ने का चाव था। वे 38 साल स्टेट बैंक में विभिन्न प्रशासकीय पदों पर तैनाती के दौरान भी निरंतर विश्व स्तरीय कालजयी साहित्य के साथ, इतिहास, दर्शन और वांग्यम साहित्य का अध्ययन करते रहे हैं।
बैंक सेवा के अंतिम दौर में जब प्रसिद्ध इतिहासकार रमेश चंद मजूमदार का बारह खण्डों में लिखा “भारत का इतिहास” पढ़ रहे थे तब उन्हें यह अहसास हुआ कि उन्हें इतिहास की गलियों से भारत की ग़ुलामी की पड़ताल करनी चाहिए। लेकिन इस विषय ओर कोई एक किताब उन्हें ढूँढने ओर भी नहीं मिली तो उन्होंने मुग़लों का पतनोन्मुख इतिहास के साथ मराठों का इतिहास, सिक्खों का इतिहास, कर्नाटक युद्धों का इतिहास, ब्रिटिश इतिहास सहित दक्षिण भारत के इतिहास का गहन अध्ययन किया। तत्पश्चात 2018 में पहली किताब “गुलामी की कहानी” प्रकाशित हुए।
सुरेश पटवा बचपन से ही पचमढ़ी के चप्पे-चप्पे से वाक़िफ़ थे। उन्होंने जेम्स फ़ोर्सिथ की “हाईलैंड ऑफ़ सेंट्रल इंडिया” को आधार बना कर “पचमढ़ी की खोज” किताब लिखी।
स्त्री-पुरुष के रिश्तों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल करते हुए “स्त्री-पुरुष” किताब लिखी।
नर्मदा घाटी के निवासी होने के नाते, नर्मदा उन्हें सहज ही बुलाती थी। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा कर तीसरी किताब “समृद्धि और सौंदर्य की नदी- नर्मदा” लिखी।
उन्होंने सम्पूर्ण सतपुड़ा पर्वत की सघन यात्रा के बाद “सुरम्य सतपुड़ा” किताब लिखी। मिर्ज़ा ग़ालिब की जीवनी ओर आधारित “दास्तान-ए-मिर्ज़ा ग़ालिब” बहुत सराही जा रही है। वे आदि शंकराचार्य की जीवनी पर आधारित उपन्यास लिख रहे हैं। इसी तारतम्य में उन्होंने “वेदों से वेदांत” और वेदांत से वैराग्य” के साथ “मैं की यात्रा का पथिक” तीन किताबें लिखीं। उनके दो व्यंग्य संग्रह, दो लघुकथा संग्रह और हिंदी सिनेमा के से स्वर्णयुग के इतिहास पर पाँच किताबें प्रकाशित हैं। इस तरह उनकी ग़ज़ल और काव्य संग्रह सहित कुल 37 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी इस अनोखी साहित्य साधना हेतु उन्हें 17 राष्ट्रीय स्तर के सम्मान से विभूषित किया जा चुका है। सम्मेलन में अध्यक्ष और मुख्य अतिथि द्वारा सुरेश पटवा को सम्मानित कर प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में रचनाकारों ने काव्यपाठ किया। सभा दुबे ने आभार प्रदर्शन किया।
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अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच
देहरादून
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