वामा साहित्य मंच की अक्टूबर माह की बैठक में गूंजित हाइकु के स्वर
-रचनाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां
-हाइकु विधा को समझाया अतिथि सदाशिव कौतुक ने
-विश्व की सबसे छोटी कविता है हाइकु -श्री कौतुक
-हाइकु 5-7-5 का कलात्मक और भावनात्मक संयोजन है
इंदौर । वामा साहित्य मंच द्वारा हाइकु विधा पर आधारित मासिक गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती सुजाता देशपांडे द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात् मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने सभी का शब्द पुष्पों से स्वागत किया और हाइकु को गागर में सागर के समान और कम शब्दों में बड़ी बात कह जाने की विधा बताया।
मुख्य अतिथि साहित्यकार सदाशिव कौतुक का आत्मीय स्वागत सचिव स्मृति आदित्य और अवंति श्रीवास्तव ने किया।
श्री कौतुक ने वामा साहित्य मंच की सदस्यों के सृजन शिल्प की प्रशंसा की और हाइकु सृजन की बारीकियों से अवगत करवाते हुए कहा कि हाइकु को हम विश्व की सबसे छोटी कविता मान सकते हैं..
5,7,5 अक्षर क्रम में हाइकु त्रि स्तरीय प्यारी रचना होती है।
पर हमें इसकी गहराई में जाकर समझना होगा कि
जब हम लिख रहे हैं तब उस क्रम में कलात्मकता भी बनी रहे, भाव भी झलक जाए और हाइकु का अनुशासन भी भंग न हो
वर्तमान में प्रकृति या मौसम केंद्रित हाइकु ज्यादा लोकप्रिय हैं. हमें हाइकु में बस एक भावनाओं से पूरित लम्हा पकड़ना होता है पूरा कथातत्त्व बुनेंगे तो हाइकु दम तोड़ देगी.
श्री कौतुक के अनुसार प्रथम दो पंक्तियां कहन का आधार रखती है और तीसरी पंक्ति उसे गहराई देती है. एक नई रौशनी देती है.
कार्यक्रम में वामा सदस्यों ने जापानी काव्य शैली हाइकु के 5-7-5 के अक्षर अनुशासन शिल्प में जीवन के विविध रंगों, संवेदनाओं और प्रकृति के सौंदर्य को बखूबी पिरोया।
रचनाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने गोष्ठी को लयात्मक बना दिया।
इस साहित्यिक संगम में उषा गुप्ता, स्वीटी टूटेजा, वृंदा उइके, आशीष होरा, भावना दामले, शारदा मंडलोई और जयश्री उपाध्याय ने अपनी मनमोहक रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
वहीं रेखा पाठक, आशा गुप्ता, डॉ. दीपा मनीष व्यास, अमिता मराठे, अर्चना पंडित, विभा जैन (ओजस), शैला अजबे, सरला मेहता और सुषमा प्रदीप मोघे ने अपनी हाइकु प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में मधुर समां बांध दिया।
गोष्ठी को समृद्ध बनाते हुए डॉ. विद्यावती पाराशर, वैजयंती दाते, रीता श्रीवास्तव, अनिता गुप्ता, चेतना भाटी, अवंति श्रीवास्तव, आशा मानधन्या, माधुरी कनल और प्रतिभा शाह ने भी अपनी सरस और भावपूर्ण हाइकु का पाठ किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन अर्चना मंडलोई ने किया, जबकि सफल आयोजन के संयोजन की जिम्मेदारी विनिता शर्मा एवं रश्मि स्थापक ने निभाई।
सभी प्रतिभागियों की सशक्त अभिव्यक्ति और हाइकु विधा के सटीक प्रयोग ने इस आयोजन को अत्यंत सफल और स्मरणीय बना दिया। अंत में कार्यकारिणी से रश्मि चौधरी ने साहित्यकारों और अतिथियों का आभार प्रकट किया।
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