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विश्व एनजीओ दिवस आज
देश में जहां 709 लोगों पर एक पुलिसकर्मी वहीं 400 पर एक एनजीओ
सतत् भविष्य का निर्माण करते एनजीओ
डॉ. केशव पाण्डेय
27 फरवरी को दुनिया भर में विश्व एनजीओ दिवस मनाया जाता है। यह दिवस एनजीओ द्वारा किए गए कार्यों और उनके योगदान के उत्सव का प्रतीक है। इस विशेष दिन का उद्देश्य लोगों को एनजीओ के साथ सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रेरित करना और निजी-सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच अधिक सहजीवन को प्रोत्साहित करना है। यह दिन हर उस गैर-सरकारी संगठन को मनाने और सम्मानित करने का है जो आगे आकर सामाजिक समस्याओं को रोकने का प्रयास करने के लिए जाने जाते हैं।
एनजीओ मतलब नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन यानी गैर सरकारी संगठन। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि यह ऐसे संगठन हैं जो लाभकारी होने के साथ ही गैर सरकारी भी होते हैं। जो गरीबों, बच्चों महिलाओं, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्र में अनेक सामाजिक कार्य करते हैं। देश में एनजीओ का 125 साल पुराना इतिहास है। भारत में स्वतंत्रता पूर्व ही अनेक संगठन सेवा के क्षेत्र में सक्रिय थे। मौजूदा परिवेश में एनजीओ व्यापक स्तर पर काम करने के साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। सरकार भी एनजीओ के लिए दिल खोलकर करोड़ों की सौगात दे रही हैं।
इस दिवस के इतिहास की बात करें तो सर्व प्रथम विश्व एनजीओ दिवस की घोषणा बाल्टिक पूर्व राज्यों में बाल्टिक सी एनजीओ फोरम के प्रतिनिधि द्वारा वर्ष 2010 में की गई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फरवरी के पहले सप्ताह को विश्व एनजीओ सप्ताह के रूप में मनाने के लिए घोषित किया।
एनजीओ के बढ़ते प्रभाव, महत्व और उपयोगिता को देखते हुए विश्व एनजीओ दिवस का वैश्विक शुभारंभ कार्यक्रम फिनलैंड के विदेश मंत्रालय द्वारा 27 फरवरी 2014 को हेलसिंकी, फिनलैंड में आयोजित किया गया था। तब से हर साल 27 फरवरी को यह दिवस को मनाने की परंपरा शुरू हुई जो अभी कायम है। दुनिया के लगभग 89 देशों और 6 महाद्वीप अपने-अपने स्तर पर इस दिवस को मनाते हैं।
दिवस को खास बनाने के लिए प्रति वर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है, जो इसके महत्व को दर्शाती है। 2024 की थीम है “एक सतत भविष्य का निर्माणः सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में एनजीओ की भूमिका।” यह विषय वैश्विक चुनौतियों से निपटने और अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा में काम करने में गैर-सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे गैर सरकारी संगठन संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान करते हैं, दुनिया भर में समुदायों में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने में उनके सक्रिय प्रयासों पर जोर देते हैं। एनजीओ पर्यावरण, सामाजिक, हिमायत और मानवाधिकार कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। वे व्यापक स्तर पर या बहुत ही स्थानीय स्तर पर सामाजिक या राजनीतिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं। समाज के विकास, समुदायों में सुधार और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोगों तक पहुंचने के लिए विभिन्न सामाजिक स्तरों पर मध्यस्थ के रूप में सरकार और आम जनता के बीच कड़ी का काम करते हैं। गैर-सरकारी संगठन विभिन्न वित्तीय स्रोतों पर भरोसा करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत दान और सदस्यता बकाया से लेकर सरकारी सहायता तक शामिल हैं।
एक अनुमान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैर सरकारी संगठनों की संख्या करीब 45 हजार है। जबकि देश में 31 लाख से अधिक एनजीओ काम कर रहे हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने देश में पहली बार पंजीकृत एनजीओ की संख्या के बारे में जांच की। यह संख्या देश में स्कूलों की तादाद का दोगुना और सरकारी अस्पतालों की संख्या से 250 गुना ज्यादा है।
देश में हर 709 लोगों पर जहां एक पुलिसवाला है, वहीं हर 400 लोगों पर एक एनजीओ काम कर रहा है। सीबीआई द्वारा की गई जांच में एनजीओ की यह संख्या और देश में मौजूद शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस जैसी अहम संस्था के साथ इसकी औसतन तुलना सामने आई है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मौजूदा परिवेश में सामाजिक कल्याण के साथ ही सतत् भविष्य के निर्माण में एनजीओ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।
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