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काव्य : जीवन गाड़ी के यात्री हम - पं. अभय चौरे हरदा मप्र


 काव्य : 

जीवन गाड़ी के यात्री हम


अपने जीवन पर ना करना अहम

जाने कब क्या कहां हो जाए 

इस पर ना कभी रखना वहम 

जीवन गाड़ी के यात्री हम ।।1

कोई आता है कोई चला जाता

समय ना किसी का होता कम 

धन वैभव सब है यहीं रह जाना 

फिर किस बात का है तुझे गम।।2

खाली हाथ आया था खाली जाना

जो कुछ कमाया है यही रह जाना 

किस बात का है तुझको

अहम 

जीवन गाड़ी के यात्री हम ।।3

जाने कहां किसका सफर खत्म हो जाए

प्रेम से रहो बनकर के हमदम

याद करे हमको ये दुनिया सदा 

काम कर जाएं ऐसा कुछ हम ।।4 

    -  पं. अभय चौरे हरदा मप्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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