प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल । राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा *कागज* विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ युवा कवि कमल सिंह कमल के विशेष आतिथ्य में तथा आबिद काजमी के संचालन में किया गया.
इस अवसर पर पिछली काव्य गोष्ठी की सर्वश्रेष्ठ चुनी गई रचना के लिये श्रीमती नीता सक्सेना को सरस्वती प्रभा सम्मान से अलंकृत किया गया.
तदुपरांत सरस्वती वंदना का वाचन किया गया. गोष्ठी के आरम्भ में कमल सिंह कमल ने पढ़ा " टेबल पर कागज रखा, रखा न उस पर वेट. काम तुम्हारा हो नहीं, या फिर होगा लेट. वहीं हीरालाल पारस ने पढ़ा " कविता तभी जन्मी, जब मन कागज पर उतर आया ". वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा " खालिस खुशबू से महक रहा हूँ इस निष्ठुर संसार में. कागज की कश्ती बढ़ रही भंवर बीच मझधार में ". वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा " कागज कलम लो हाथ में चिट्ठी लिखा करो. सोना है मेरे देश की मिट्टी लिखा करो " इनके इलावा ऐस ऐन शर्मा, उमेश तिवारी, आर के झा,अशोक धमेंनिया,बी एल गोहिया,डॉ. राजेश तिवारी, हरिओम सोनी, संत कुमार संत दिनेश भदोरिया ,वृन्दावन राय सरल, विरोनिका पीटर, शिवराज सिंह, डॉ. सीमा अग्रवाल, सरोज लता सोनी, क्षमा निमोरे कृष्ण देव चतुर्वेदी, मोखेरे,सुरेश पवरा,दिनेश मोहन श्रीवास्तव,चंद्रभान राही, कैलाश शर्मा, कमल सिंह मरकाम आदि ने काव्य पाठ किया.
अंत में रमेश नन्द ने सभी का आभार व्यक्त किया.
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