मिश्री मिले माखन सा मधुर काव्य : डॉ गोपाल माहेश्वरी
इंदु पाराशर की तीन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ
इंदौर । वामा साहित्य मंच के बैनर तले इंदु पाराशर की तीन पुस्तकों का लोकार्पण श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति में किया गया.
अमर चड्ढा द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम में संस्था प्रमुख ज्योति जैन ने सभी का स्वागत किया . उन्होंने कहा कि राम कृष्ण पंरपरा की अविरल धार बहाती इन कृतियों में भारतीय संस्कृति की सुगंध मौजूद है जो पाठक को अभिभूत करने की क्षमता रखती है.
अपनी बात कहते हुए इंदु पाराशर ने कहा तकलीफ में माता पिता और ईश्वर ही याद आते हैं.घनीभूत पीड़ा के क्षणों में ही इन कृतियों की रचना हुई.राम-कृष्ण जैसे महान चरित्रों को लिखा नहीं जाता वे तो भीतर गहरे तक उतरते हैं.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ विकास दवे ने कहा कि मूल सन्दर्भों से काटकर पौराणिक चरित्रों को व्यक्त करना वास्तविक लेखन नहीं है.लेखिका ने अपनी तीनों कृतियों में इन्हें अक्षुण्ण बनाए रखा है.नई पीढ़ी को आज समाज में रावणों,कंसों और पूतनाओं आदि को पहचानने की आवश्यकता है .
चर्चाकार डॉ गोपाल माहेश्वरी ने कहा कि "श्री कृष्ण बाल लीलायनम " के 31 अध्यायों में मिश्री मिले माखन सा मधुर काव्य मौजूद है.पद्यों में यत्र - तत्र ,सर्वत्र ,काव्य गुण , शब्द शक्तियां और काव्यालंकार प्रकट हुए हैं.भाषा में सधाव,सामर्थ्य और तारल्य है.चित्ताकर्षक और मनोहारी चित्रों ने कृति के काव्य बोध को और अधिक सुगम्य बना दिया है . कृष्ण आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पुरातन काल में थे .
डॉ माला ठाकुर ने ''संस्कृति सुरभि '' को एक ऐसा काव्य संग्रह बताया जिसमें नवरसों का सम्मिश्रण निहित है . जिसमें त्याग, शौर्य,पराक्रम, स्त्री के भिन्न रूप, धर्म, राष्ट्र , भौतिक वाद,समरस समाज की बात,भारत की मूल चेतना और वर्तमान संवाद हीनता का मर्म मौजूद है.भारतीय संस्कृति की सुगंध का समावेश पुस्तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
अंतरा करवड़े ने "राम वीथिका" पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पुस्तक सार्थक शीर्षक के साथ पात्रों के संग पाठक को अयोध्या, मिथिला आदि स्थानों के गलियारों से गुजरने की प्रतीति करवाती है.लेखिका ने राम के राज धर्म को रेखांकित करते हुए उनके चरित्र को पूरी ईमानदारी के साथ रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत किया है.
कार्यक्रम का सुगठित संचालन पद्मा राजेन्द्र ने किया. डॉ मनीष चौहान व डॉ रागिनी सिंह ने डॉ विकास दवे, डॉ पंकज पाराशर व पंखुरी पाराशर ने डॉ गोपाल माहेश्वरी, डॉ अंकिता पाराशर व डॉ आराधना तिवारी ने माला ठाकुर , अनुपमा गुप्ता एवं शौर्य पाराशर ने अंतरा करवड़े का स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए .आभार डॉ पंकज पाराशर ने प्रकट किया. संस्था की सदस्याओं के अतिरिक्त सभागार में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे.
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