काव्य :
भगवत गीता
कुरुक्षेत्र में जब
बजा बिगुल, समक्ष
प्रियजनों को देख,
धनुर्धर ने रख दिया धनुष,
तब भगवान ने गाया गीत
वर्णन किया सारा
वर्तमान-भूत-भविष्य
सर्वश्रेष्ठ प्रेरणा वक्ता बने,
देवीय संवाद कृष्ण करे,
धार्मिक ही नहीं, ज्ञान
की सबसे बड़ी कुंजी,
जीवन पथ पर कैसे बढ़े ?
कर्मो को कैसे गढ़े?
खुशी क्या है?
हम क्यूँ है?
कैसे आए धरा पर ?
कहाँ जायेंगें?
क्या फिर आयेंगे?
व्यक्तित्व निर्माण ,
भावनात्मक स्थिरता ,
निर्णय लेने की क्षमता ,
परिस्थितियों से निपटने ,
सकारात्मक बने रहने का ,
लक्ष्यों को पूर्ण करने का ,
पूर्णता से जीने का,
तत्पश्चात भगवत धाम
प्रस्थान को क्या संजोए
जीवन सत्य है या भ्रम?
कर्म क्यूँ और कैसे करें?
तमाम प्रश्नो की उत्तरपुस्तिका
हमारी भगवत गीता।
विराट गुरू कृष्ण,
नतमस्तक अर्जुन ,
देवविधालय कुरूक्षेत्र
कर्म से भागते माया मे ,
लिपटे अर्जुन निष्काम
कर्म कर विजयी हुए ।
गीता सारगर्भित है ,
तीनो काल के संदर्भ मे,
गीता पढ़े , पुनर्निर्माण करे,
पथ प्रदर्शक ये भगवत गीता।
--रानी पांडेय , रायगढ छत्तीसगढ़ ।

