ad

धनतेरस की महता : - रजनी प्रभा ,मुजफ्फरपुर


 धनतेरस की महता : 

 -      रजनी प्रभा ,मुजफ्फरपुर

समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा  धनतेरस पंचदिवसीय त्योहार में दिवाली के पहले दिन मनाया जाने वाला पर्व है जो धन,वैभव,सुख,समृद्धि और खुशहाली पर जोर देता है कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मां लक्ष्मी,कुबेर और आयुर्वेद के भगवान धनवंतरी को समर्पित होता है।घर के कोने_कोने की साफ _सफाई की जाति है और घर को सभी यथाशक्ति सजाने का पुरजोर प्रयास करते हैं।जिनमे रंगोली की भूमिका अहम होती है।सुंदर,सुयोग दिवस धनतेरस त्रयोदसी को मनाया जाता है।धनतेरस भगवान धन्वंतरि की पूजा है, जो स्वास्थ्य और आयुर्वेद के देवता हैं। ऐसा माना जाता है कि वे समुद्र मंथन से अमृत कलश और पवित्र आयुर्वेदिक ग्रंथ लेकर निकले थे।  भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को ही सबसे बड़ा धन माना गया है अत: भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। उनका जन्म दूध के सागर (समुद्र मंथन) के मंथन से हुआ था, जिसके दौरान वे सोने से भरा बर्तन लेकर निकली थीं।इन दोनों की कृपा प्राप्ति हेतु इस दिन कुछ प्रमुख कार्य अनिवार्य रूप से किए जाते रहें हैं जैसे भारतीय संस्कृति में सोना समृद्धि, सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक है।ऐसा कहा जाता है कि यह बुरी आत्माओं या नकारात्मक ऊर्जाओं के खिलाफ़ सुरक्षात्मक शक्ति प्रदान करता है।

 सोना खरीदना धन और ढेर सारा पैसा आकर्षित करने के लिए उन्हें घर में आमंत्रित करने का एक तरीका है।साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के मुसीबत में आर्थिक रूप से उबरने में सहायक सिद्ध होती है।धनतेरस पर सोना और अन्य वस्तु खरीदना एक परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है, जिससे परिवार अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं। यह परंपरा न केवल पुराने रीति-रिवाजों का सम्मान करती है बल्कि ऐसे अवसरों को मनाने में परिवारों को एकजुट भी करती है।कहा जाता है इस अवसर पर खरीदी गई वस्तु वित्तीय रूप से कभी कुप्रभावित नहीं होती।धनतेरस को जो वस्तु हम खरीदते हैं उसकी पूजा दिवाली की रात की जाती है ऐसी परंपरा रही है जिसमें सोने_चांदी के साथ _साथ कौड़ी,धनियां,हल्दी,चीनी,गोमती चक्र, नमक ,गुड,झाड़ू और कमलगट्टा खरीदने का विशेष महत्व है।पूजा में सिरनी और लावा का प्रयोग भी अनिवार्य है।इस दिन सुख_सौभाग्य हेतु धनतेरस पर पीतल की कोई चीज खरीदकर भगवान धन्वंतरि को जरूर चढ़ाएं. फिर धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें और अंत में मां लक्ष्मी, कुबेर देवता और धन्वंतरि जी की आरती करें.इस दिन तिथि अनुसार ही 13 दिए जलानें का विधान रहा है।ये तेरह दीपक भगवान कुबेर को समर्पित हैं, जिन्हें धन, कीमती सामान और वैभव का मालिक माना जाता है। इस दिन यमराज की भी पूजा की जाती है।ऐसी मान्यता है की धनतेरस के दिन विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना और दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती।इस दिन भगवान शनि के निम्न मंत्र को पढ़ने से भी कोई अनहोनी नहीं घटित होती_

ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया। कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।

शनेर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्। दुःखानि नाशयेन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखम।।

पंच दिवसिय महापर्व के पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन छोटी दिवाली, तीसरे दिन दीपावली पर्व, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवे दिन भैया दूज का पर्व मनाया जाता है।इस प्रकार से पूर्ण होता है ’पंच पर्व’।

इस पंचदिवसीय त्योहार में बाजारों में धूम मची होती है।सड़कें,गलियां, इमारतें सभी जगमगा रहे होते है।लोगों के भीतर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।प्रकृति भी सहचरी हो उठती है।मौसम अत्यंत मनमोहक हो जाता है।शीतल बयार चित शुद्धि का कार्य करती है।पशु_पक्षी सभी प्रसन्नचित मुद्रा में होते है।इस साल ये त्योहार आप सब के जीवन में सुख_सौभाग्य  लेकर आए,नव जीवन में नित नूतन उल्लास भरे इन्हीं सुभेक्षाओं के साथ आप सभी को धनतेरस की शुभकामनाएं और बधाई।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post