काव्य :
नारी शक्ति
अवरोधों से भरा हो चाहे जीवन ,
उलझनों से भरा हो चाहे मन …!
नवरात्रि के नौ दिनों में कुछ -कुछ
प्रफुल्लित सा हो जाता है तन ….!!
सरस्वती का करके स्वागत
कन्या को पढ़ाने का हो संकल्प !
भ्रूण हत्या से करके तौबा ,
दुर्गा को मारने का न हो विकल्प ….!!
घर की नारी को मान लक्ष्मी,
आर्थिक स्वतंत्रता मिले उसे हर घर !
औरत नहीं केवल भोग वस्तु जान ले ,
आत्मविश्वास से मिले ज़ीने का हक …!!
दहेज के लिए न हो सती जब नारी ,
पार्वती बन कर वो लाए उजियारा !
काली के रूप सा ले कर वरदान ,
दुष्टों का नाश कर मिटाये अंधियारा …..!!
सभी नारी को दे कर उचित अधिकार ,
नवरात्रि का पर्व मनाये हर परिवार !
संदेह को रख के दूर चलो सभी ,
नारी उत्थान से करें माता का रूप साकार ….!!
- कुन्ना चौधरी, जयपुर
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