स्वास्थ्य सजगता, सम्मान और सुरक्षा से नारी सशक्तिकरण संभव
इंदौर । नारी सशक्तिकरण इसलिए आवश्यक नहीं है कि नारी अशक्त है वरन नारी के आस पास ऐसा वातावरण निर्मित करना कि वह अपनी असीमित शक्ति को सही तरीके से इस्तेमाल कर सके, नारी सशक्तिकरण है। इसी बात को वामा साहित्य मंच ने अपनी मासिक बैठक ' शक्ति रूपा नारी' में रेखांकित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट डॉ प्रीति जैन ने कहा कि - महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को पहचान कर जागरूक रहना होगा। आवश्यक नहीं की हर गठान कैंसर की हो, लेकिन संभावनाएं अधिक होती हैं।
इसके साथ ही खान पान शैली में संतुलन हो और नियमित व्यायाम महिलाओं के लिये भी अनिवार्य हो। युवाओं से अधिक खतरा मेनोपॉज की उम्र की महिलाओं को होता है अतः उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए।
मंच की सदस्यों ने नारी शक्ति के विभिन्न आयामों पर कथा, कविता और आलेख के माध्यम से प्रकाश डाला।सरला मेहता ने आवाहन किया कि बन जाओ फौलादी सीख लो सारे पैंतरे
जूडो कराटे की सारी चालों को अपनाना है।नूपुर वागले की लघुकथा में पिता और पति का प्रेरक रूप दिखा।
सुजाता देशपांडे ने कहा कि नारी का कोई सानी नहीं।हंसा मेहता ने कविता में नारी को जग की अर्ध शक्ति बताया।भावना दामले ने कहा कि नारी को शक्ति का प्रयोग समाज हित में करना है।माधुरी निगम का कहना था,मत रोको मुझे, मत टोको, मैं नया इतिहास रचाऊंगी।आशा मानधन्या ने कहा कि भारतीय दर्शन में नारी का स्थान सदा ऊंचा रहा है।उषा गुप्ता ने प्रश्न उठाया कि नारी को कैद में रखने की कोशिश क्यों की जाती है? विभा जैन ओजस ने नारी को जग की कर्णधार बताया।वाणी जोशी,अमिता मराठे,आरती दुबे,विभा जैन ने भी रचनाएं प्रस्तुत की।
कैंसर को परास्त करने वाली विजेता रूप मे मंच की सदस्य कोमल रामचंदानी और वंदना पुणतांबेकर ने अपने प्रेरक अनुभव साझा किए।
साथ ही महिला दिवस पर आयोजित स्लोगन प्रतियोगिता की विजेता आशीष होरा,सुमन कश्यप ,चंद्रकला जैन, सुषमा मोघे और आशा गर्ग को इस अवसर पर पुरस्कार प्रदान किए गए।
आरंभ में सरस्वती वंदना रचना चोपड़ा ने प्रस्तुत की।
स्वागत भाषण अध्यक्ष इंदु पाराशर ने दिया।
संचालन वैजयंती दाते ने किया और आभार रचना सक्सेना ने किया।
अंत में वामा साहित्य मंच की संरक्षक के जीवनसाथी शहर के जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एमसी नाहटा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।।

