ब्राम्हण को मनसा, वाचा, कर्मणा, अपने ब्राम्हणत्व को बना कर रखना अत्यंत आवश्यक - आचार्य श्री योगेशजी पांडे
खण्डवा । "ब्राम्हण को मनसा, वाचा, कर्मणा, अपने ब्राम्हणत्व को बना कर रखना अत्यंत आवश्यक है, और यह अपनी संस्कृति और सनातन धर्म के बताए मार्ग पर वेद पुराणों का अध्ययन, शास्त्रों का नियमित पाठ करने से ही सम्भव है।"
यह विचार आचार्य श्री योगेशजी पांडे बालीपुर संस्थान ने कहे। नार्मदीय धर्मशाला खंडवा में आज ब्राम्हणों को संध्याकर्म, गायत्री उपासना तथा श्री दुर्गासप्तशती पाठ के नियमित अध्ययन से जोड़ने तथा पाठ के सही व्याकरण को समझने के लिए अम्बिका आश्रम बालीपुर से संचालित ऑनलाइन साप्ताहिक पाठशाला में सभी से जुड़ने का संदेश देने के लिए बालीपुर आश्रम से पधारे आचार्य श्री योगेश जी पाण्डे तथा श्री रविन्द्र शर्मा, श्री आनंद मलतारे जी तथा श्री मुकेश मेहता जी पधारे।
खंडवा तथा क्षेत्र के नियमित साधकों द्वारा इस आयोजन की पूर्व तैयारियों में सभी ब्राम्हणों को सम्पर्क कर आमंत्रित किया तथा सभी को ऑनलाइन शास्त्रोक्त पाठशाला से जुड़ने की अपील की। खंडवा ब्राम्हण समाज साधक मण्डल से श्रीकांत शुक्ला, पंकज शर्मा, शैलेन्द्र सोहनी, पवन गीते, उज्ज्वल उपाध्याय, रमाकांत पाराशर, रघुनंदन चन्द्रे, जगदीश पगारे, आशुतोष सोहनी, राजेश गुहा, योगेश कोटवाले, मंगलेश उपाध्याय, प्रशांत बारचे, योगेंद्र जोशी, तथा महिला साधकों में श्रीमती नीना गीते, राकेश गीते, सुषमा जोशी, राजश्री गीते, ज्योति कोटवाले, दीपिका गीते, अंतिम गीते, सोनाली व्यास, प्रेमलता पाराशर आदि थे। कार्यक्रम का संचालन सत्येन्द्र सोहनी ने किया तथा आभार श्रीकांत शुक्ला ने माना।

