ad

काव्य : हताशा और अंहकार हम को मार देता है -एस के कपूर "श्री हंस", बरेली


 काव्य : 

हताशा और अंहकार हम को मार देता है

।।विधा ।।गीत  ।।

*********

*हताशा और अहंकार हम  को मार देता है।*

जीतते हुए भी   हमको   केवल  हार देता है।।

********

यह मत सोचो कितने    पल मिले हैं जिंदगी में।

उत्साही लोगों को ही सुंदर कल मिले हैं जिंदगी में।।

गलती से सीखने वाला   जीवन  सुधार लेता है।

*हताशा और अंहकार हम  को मार देता है।।*

**********

मैदान में हारा हुआ फिर  भी बाजी जीत सकता है।

लेकिन मन से हारा नहीं कोई बाजी पीट सकता है।। 

जो नहीं खोता जोश ओ होश  जीवन संवार लेता है। 

*हताशा और अंहकार हम  को मार देता है।।*

********

बाद मरने के भी यादों की उम्र जीता है आदमी।

कोई कई बार मरता जो प्रेम से रीता है आदमी।।

कटु नहीं मीठी वाणी को ही सम्मान संसार देता है।

*हताशा और  अंहकार हम  को मार देता है।।*

***********

जिंदगी आसान नहीं होती आसान बनानी पड़ती है।

फीकी लकीरों में हमें खुद ही रंगत लानी पड़ती है।।

अच्छी सोचऔरअच्छा कर्म दुखों में भी बहार देता है।

*हताशा और अंहकार  हम को मार देता है।।*

********.

- एस के कपूर "श्री हंस", बरेली।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post