काव्य :
हताशा और अंहकार हम को मार देता है
।।विधा ।।गीत ।।
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*हताशा और अहंकार हम को मार देता है।*
जीतते हुए भी हमको केवल हार देता है।।
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यह मत सोचो कितने पल मिले हैं जिंदगी में।
उत्साही लोगों को ही सुंदर कल मिले हैं जिंदगी में।।
गलती से सीखने वाला जीवन सुधार लेता है।
*हताशा और अंहकार हम को मार देता है।।*
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मैदान में हारा हुआ फिर भी बाजी जीत सकता है।
लेकिन मन से हारा नहीं कोई बाजी पीट सकता है।।
जो नहीं खोता जोश ओ होश जीवन संवार लेता है।
*हताशा और अंहकार हम को मार देता है।।*
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बाद मरने के भी यादों की उम्र जीता है आदमी।
कोई कई बार मरता जो प्रेम से रीता है आदमी।।
कटु नहीं मीठी वाणी को ही सम्मान संसार देता है।
*हताशा और अंहकार हम को मार देता है।।*
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जिंदगी आसान नहीं होती आसान बनानी पड़ती है।
फीकी लकीरों में हमें खुद ही रंगत लानी पड़ती है।।
अच्छी सोचऔरअच्छा कर्म दुखों में भी बहार देता है।
*हताशा और अंहकार हम को मार देता है।।*
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- एस के कपूर "श्री हंस", बरेली।

