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काव्य : छठ पूजा समापन राम वल्लभ गुप्त इंदौरी',इटारसी


 काव्य : 

छठ पूजा समापन


भुवन भास्कर श्री सूर्य देवता

जो जीवों के जीवन प्रदाता 

सृष्टि के हैं वे ही हैं निर्माता 

वे  ब्रह्मांड के प्रकाश दाता


सूर्य देव की पूजा अर्चना 

हम भी करते उनकी वंदना 

उत्सव- पर्व करें अभ्यर्थना 

हे वंदना, वंदना है, वंदना


अर्ध्य चढ़ाने नदी किनारे,

आती भीड़ छोड़ काम सारे 

महाभारत का है यह प्रसंग 

श्रवण करें आओ मेरे संग


राजपाट  जब कौरवों से हारे,

टूटे पांडव थे,मनको थे मारे

तब व्रत रखकर पांचाली ने 

किया प्रभु कृष्ण का  स्मरण 

हुआ छठ मैया महिमा आरंभ


यही पुराणों का है सार  

सूर्य देव की पूजा का प्रसार

आया यह अनुपम त्यौहार

रहता सबको इसका इंतजार 


छठ तिथि में, दीवाली बाद,

खाय नहाय, सब प्रेम संवाद

होत खरना भोग प्रसादी का 

ब्रह्मा विष्णु महेश समझाय।।


छठ  पूजा के,दिन  हैं चार

सूर्य देव की पूजा का त्योहार रंग-बिरंगे चबूतरे महक उठे 

थाल आरती फूल सजने लगे 


माता बहने पूजा करने जातीं,

लाल रंग की साड़ी पहनतीं

सिक्के को कलश पर रखें

सब की मंगल कामना करें


भक्ति भाव से पूजा करतीं,

सब नदियों का स्मरण करतीं   क्रम क्रम से अर्घ चढातीं

निराहार वे नारियां  रहतीं


यह आस्था का है महाकुंभ

नमामि देवी गंगे, महागंग

कहे *राम इंदौरीछठ पूजा के समापन में अनेकों रंग ही रंग

- राम वल्लभ गुप्त इंदौरी,इटारसी

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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