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व्यंग्य : कॉकरोच – रसोई से अब देश के कोने-कोने तक -मिलन चौबे (शिक्षाविद) , जबलपुर


 

व्यंग्य : 

कॉकरोच – रसोई से अब देश के कोने-कोने तक

    कल तक मामला सिर्फ रसोई तक सीमित था। बीवी कुर्सी पर, पति चप्पल लेकर, और कॉकरोच सिंक के नीचे। पर अब सुनने में आया है कि *महाराज ने प्रमोशन ले लिया है*। अब वो सिर्फ किचन के नहीं, *पूरे देश के बेताज बादशाह* बनने निकले हैं।  

*1. विस्तार नीति: 'एक किचन, एक देश'*  

पहले इनका एजेंडा था – "घर-घर किचन, घर-घर आतंक"। 

अब नया नारा है – *"गली-गली में शोर है, कॉकरोच सरकार का दौर है"*।  

रेलवे स्टेशन की बेंच के नीचे से लेकर संसद की लाइब्रेरी तक, हर जगह इनके दूत तैनात हैं।  

*जहां गंदगी, वहां सरकार।*

*2. नई जनसंपर्क नीति: 'हर घर दस्तक'*  

अब महाराज सिर्फ किचन तक सीमित नहीं।  

बाथरूम में शॉवर के नीचे, बेडरूम में अलमारी के पीछे, ऑफिस में फाइलों के ढेर में – *हर जगह VIP एंट्री*।  

नया नियम: *"जिस घर में हम नहीं, वो घर सरकार की नजर में नहीं"*।  

डाकिया चिट्ठी लाए ना लाए, ये महाराज हर महीने हाल-चाल पूछने जरूर पधारते हैं।  

*जनता और नेता में सीधा संवाद।*

*3. चुनाव चिन्ह और प्रचार*  

चुनाव चिन्ह: *"भागते हुए ये स्वयं"*।  

चुनावी वादा: *"हम आएंगे तो हिट हटाएंगे, लक्ष्मण रेखा मिटाएंगे"*।  

रैली की जगह: रात 2 बजे आपकी किचन।  

वोटर लिस्ट: जिस घर में एक बार भी "मम्मीईईई रे- कॉकरोच" की चीख निकली, वो पक्का वोटर।  

*नतीजा: एकतरफा जीत। विपक्ष अभी भी कुर्सी पर चढ़ा है।*

*4. राष्ट्रीय उपलब्धियां*  

1. *'डिजिटल इंडिया' को टक्कर:* 5G से तेज भागते हैं। कोने में घुसते ही नेटवर्क गायब।  

2. *'मेक इन इंडिया' का ब्रांड एंबेसडर:* 100% स्वदेशी। ना वीजा, ना पासपोर्ट, फिर भी हर घर में।  

3. *'महिला सुरक्षा':* इनके डर से रात को कोई महिला किचन में अकेली नहीं जाती। पति को साथ ले जाना पड़ता है। *पति-पत्नी साथ-साथ – समाज सुधार।*  

4. *'रोजगार योजना':* हिट कंपनी, मॉर्टिन कंपनी, पेस्ट कंट्रोल वाले – सबको रोजगार इन्होंने ही दिया है।  

*5. विदेशी घुसपैठ पर बयान*  

अमेरिका का कॉकरोच बोला "We are bigger"।  

अपने वाला बोला *"साइज मैटर नहीं करता, खौफ मैटर करता है। तुम्हें देखकर वहां की बीवी कुर्सी पर नहीं चढ़ती, हमारी वाली चढ़ती है"*।  

*राष्ट्रवाद की जीत हुई।*

*6. जनता से अपील*  

महाराज का राष्ट्र के नाम संदेश:  

"मितरों, मैंने ना घोटाला किया, ना दंगा करवाया। मैंने सिर्फ एक काम किया – *तुम्हें डराया*।  

और इस डर से तुम्हारे घर में एकता आई, पति को इज्जत मिली, हिट की बिक्री बढ़ी, GDP में योगदान दिया।  

अब बोलो, *मुझसे बड़ा राष्ट्रभक्त कौन?*"

*निष्कर्ष:*  

पहले हम कहते थे "हमारा देश महान"।  

अब कहना पड़ेगा *"हमारा देश महान, और कॉकरोच यहां का किसान"*।  

क्योंकि वो ही है जो बिना बोए, बिना जोते, हर घर में फसल उगाता है – *दहशत की फसल*।  

* और हाँ शायद, आगे आने वाले सालों में 15 अगस्त को लाल किले से नहीं, *आपकी रसोई के सिंक से भाषण होगा*।  

थीम: *"विकसित भारत के विकसित कॉकरोच"*।  

और सारे देशवासी अपनी-अपनी कुर्सी/सोफे पर चढ़कर सुनेंगे।


-  मिलन चौबे (शिक्षाविद) , जबलपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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