चार दिवसीय "तुलसी उत्सव रघुनाथ गाथा" का आयोजन हुआ
चित्रकूट । म.प्र. संस्कृति परिषद् एवं जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकामदी के अंतर्गत संचलित तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट द्वारा आयोजित चार दिवसीय "तुलसी उत्सव रघुनाथ गाथा" का दीपावली के पावन अवसर पर दिनांक 29 अक्टूबर 2024 से दिनांक 01 नवम्बर 2024 तक विगत वर्षो की भांति इस वर्ष भी चित्रकूट के प्रमोदवन में "तुलसी मंच" पर सम्पन्न हुआ, जिसमें रामलीला व्याख्यान, प्रवचन, रामकथा भक्ति कार्यक्रम किये जाते है।
प्रथम दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन एवं गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण के द्वारा प्रारम्भ हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में युवराजस्वामी श्री बद्रीप्रपन्नाचार्य जी महाराज आचार्य मन्दिर चित्रकूट थे, उन्होने दीपोत्सव की महिमा पर प्रकाश डालते हुये, चित्रकूट की महिमा तथा श्रीराम के चित्रकूट प्रवास पर प्रवचन दिया तथा डॉ0 कुसुम सिंह जौनपुर उ0प्र0 के द्वारा चित्रकूट में श्रीराम विषय पर व्याख्यान दिया गया इसके पश्चात नाट्य वेद नाट्य संस्थान उज्जैन द्वारा तुलसी के रत्न-रत्ना विषय पर बहुत सुन्दर नाटक का मंचन किया गया। मंच संचालन तथा विषय प्रवर्तन, तथा इस आयोजन के उद्देश्य सार्थकता पर प्रो0 अवधेश प्रसाद पाण्डेय जी ने प्रकाश डाला।
द्वितीय दिवस दिनांक 30 अक्टूबर को मिथिलांचल अवध आदर्श रामलीला फाउन्डेशन द्वारा प्रथम पाली में श्री राम जन्म, ताडका वध, अहिल्या उद्धार के प्रसंगो का मंचन किया गया इसके पश्चात् डॉ0 नलिन दुबे रीवा द्वारा वनवास में श्रीराम विषय पर व्याख्यान दिया गया भक्ति गायन सुश्री मणिका पाण्डेय सीधी द्वारा भक्तिपद गाये तथा प्रांतीय कलाकार संघ रीवा द्वारा विनय पत्रिका के कई पद एवं भक्ति गायन हुआ इसके पश्चात् पुष्पवाटिका, लक्ष्मण परशुराम संवाद एवं विवाह के प्रंसगों का रामलीला का मंचन हुआ।
त्रितीय दिवस दिनांक 31 अक्टूबर 2024 को रामलीला में प्रातः प्रथम पाली में वनवास, केवट प्रसंग, भरत मिलाप के प्रसंगों का मंचन हुआ। दितीय पाली में काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के विधि संकाय के प्रवक्त्ता डॉ0 नवल किशोर मिश्रा ने ‘‘ श्रीराम के आदर्श एवं लोक जीवन’’ विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ0 मिश्रा ने रामायण को वेदों का अवतार बताते हुये पांचवा वेद बताया एवं श्री रामचरित मानस उसी का प्रतिरूप् है। श्रीराम के आचरण व्यवहार मर्यादा के विभिन्न स्वरूप का उल्लेख करते हुये जन मानस को अपने आचरण मे उतारेन का आहवान किया एवं अनुकरणीय बताया। रामराज्य ही लोक तन्त्र का आधार होना चाहिये एवं केवल भारतीय संस्कृति ही त्याग सिखाती है विश्व की अन्य संस्कृति भोग की बात करती है। औरंगजेब का उदारहण देते हुए सभी भारतीय संस्कृति और भगवान राम के त्याग का उदाहरण दिया। रामराज्य की स्थापन भगवान राम ने अयोध्या का राजसिंहासन त्यागकर भारत के जन जन को जोडकर राष्ट्रीय सनातन संस्कृति की स्थापना की। इसके पश्चात् सुश्री पुष्पा रामायणी जी ने राम कथा के माध्यम से भाई-बहन के रिश्तों पर जयन्त की कथा, जटायू की मार्मिक कथा तथा सीता की खोज में राम का विरह की हदय स्पर्शी कथा संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसके उपरान्त श्री अरविन्द कुमार पटेल एवं उनकी टीम ने बघेली लोकगीत में रामकथा, सोहर, बरूआ, विवाह, विदाई, बनगमन राज्यभिषेक की कई लोक गीतों में राम किस प्रकार से जनमानस में व्याप्त हैं, सुन्दर संगीतमय, विवाह के समय बैंड बाजा की प्रस्तुति की। रामलीला मंे सीताहरण, सुग्रीव मित्रता बालिबध का मंचन किया गया।
चतुर्थ समापन दिवस 01 नवम्बर 2024 को अखाडा परिषद के राष्ट्रीय कोतवाल मंहत भैरवदास जी महराज द्वारा मंगलाचरण तथा कई निर्गुण एवं संगुण पदों की सुन्दर प्रस्तुति दी तथा भक्ति साधना पर भी कई भजनों को प्रस्तुत किया। डॉ0 आर0के0 पाण्डेय जी द्वारा भक्ति गायन के रामकथा प्रस्तुत की आज की संस्कृति में संस्कारों पर जोर दिया साथ में श्री अजय मिश्रा एवं उनकी टीम ने सुन्दर भक्ति गायन प्रस्तुत किया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि जगतगुरू स्वामी रामानन्दाचार्य स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य कामदगिरी पीठाधीश्वर प्रमुख द्वार कामतानाथ जी के द्वारा द्वीप प्रज्जवलन तुसलीदास जी चित्र पर माल्यार्पण तथा चित्रकूट की महिमा ‘‘कामद मेगिरि राम प्रसादा अवलोकत अपहरत विषादा’’ की विस्त्रत व्याख्या की गई सभी आमंत्रित विद्वानों की शाल श्रीफल रामचरित मानस की पोथी प्रदान कर सम्मानित किया गया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन संयोजन प्रो0 अवधेश प्रसाद पाण्डेय जी पूर्व निदेशक तुलसी शोध संस्थान द्वारा किया गया, प्रतिदिन पाण्डेय जी द्वारा रामकथा के विभिन्न प्रसंगों, रामायण की उत्पत्ति, रामकथा का आगमन, रामनाम की महिमा पर शोध परख विवेचना की गई। तथा आभार प्रकट किया।
पूरे कार्यक्रम की सुन्दर व्यवस्था प्रबंधन तुलसी शोध संस्थान के कर्मचारी श्री राधामोहन मिश्र तथा श्री रामेश्वर प्रसाद पटेल द्वारा की गई, रामेश्वर प्रसाद पटेल के द्वारा सबके प्रति आभार प्रकट किया गया।

