काव्य :
योग
मन,मस्तिष्क के संतुलन का
व्यायाम है,योग
जिसमे तन का होता है,
आत्मा से ,मिलन का, संयोग
हो तनाव ग्रस्त ,यदि जीवन,
व्याधि ,सताएं शरीर
योग, क्रिया करने से
मिटती है,तन की पीर
योग ,पुराना है बहुत,
है जितना, वैदिक काल
स्वस्थ जीवन ,के लिए
करिए योग,हर हाल
मंत्र योग, हठ योग और
दो हैं और प्रकार
लय योग,और राज योग
योग करें ,साकार
ऋषि पतंजलि ने दिए
योग के सूत्र,आठ
स्वस्थ तन और बुद्धि हेतु
अपनाएं इन्हे आप
यम,नियम,आसन
प्राण्याम,प्रत्याहार
धारणा,ध्यान,और समाधि
हैं ,सूत्र के आठ प्रकार
भगवद्गीता में योग के,
हैं, दो प्रकार
कर्म योग,और भक्ति योग
जन करते,व्यवहार
स्वस्थ तन और मन रखें
कर के, हम नित योग
दूर, तनाव को करें, और
ब्रज, दूर करें सब रोग
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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