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काव्य : "दोहे" "लाना नित्य निखार" -त्यागी अशोका कृष्णम् , कुरकावली,संभल,उत्तर प्रदेश


 काव्य : 

"दोहे"

"लाना नित्य निखार"


प्रात काल के योग से, दूर रहें सब रोग।

गुणकारी गुरु मंत्र सा, संजीवन रस योग।।

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जीवन को सुंदर बना, करके साधन योग।

वेदों की शिक्षा यही, कहते सुनते लोग।।

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एक-एक का योग भी,कहलाता है योग।

भोग हुआ जब योगमय,मिटे सभी दुर्योग।।

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सबके मन में रम रहे,रोग भोग संभोग।

जिसका जैसा योग हैं,उसका वैसा भोग।।

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जो मन चाहे भोगना, कुल वसुधा के भोग।

तन को मन में ढाल ले, मन से कर ले योग।।

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दिया हुआ भगवान का,तन सुंदर उपहार।

कृष्णम् नियमित योग से,लाना नित्य निखार।।


- त्यागी अशोका कृष्णम् , 

कुरकावली,संभल,उत्तर प्रदेश

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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