काव्य :
रक्षा बंधन
कितना सुन्दर देश है अपना,कितना प्यारा प्रेम है अपना।
भाई बहन के प्यार का सपना,कितना पवित्र त्योहार है अपना।
मैंने पूजा की थाली सजाई,रोली चंदन अक्षत लाई।
भैया जरा आगे करो कलाई,राखी बांँधू कलाई मेरे भाई।
थोड़ा सा तुम मुस्कुराओ,चेहरे पर हंँसी खुशी है लाओ।
राखी बांँधू मै खुश हो जाओ,पेड़ा बरफी मिठाई खाओ।
जो भी देना हैसियत से देना,नहीं किसी से कर्जा लेना।
तुम्हारी खुशी मेरी खुशी है,खुश रहने का आशीर्वाद देना।
एक दिन मेरी होगी शादी,भाभी आप भी लाना भाई।
मत समझना मुझे पराई,मैं भी हूंँ इस घर की जाई।
प्रेम भाव से सम्बन्ध रखना,मुझे नहीं चाहिए कोई गहना।
मुझे कभी नहीं भूलना भैया,मैं तो हूँ तेरी प्यारी बहना।
- कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव
मुम्बई
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