तियानजिन से निकला विश्व शांति का नया मंत्र
[भारत की कूटनीति ने बदला समीकरण, गूँजा वैश्विक समर्थन]
आतंकवाद का जहर मानवता के लिए एक घातक महामारी है, जो न केवल देशों की सीमाओं को लांघता है, बल्कि शांति और सभ्यता के मूल ढांचे को तार-तार करने की साजिश रचता है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ भीषण आतंकी हमला इस खतरे की विकरालता को रक्तरंजित अक्षरों में उकेरता है। इस हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली पर्यटक की जान चली गई, जबकि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस जघन्य कृत्य की जिम्मेदारी ली। इस अमानवीय क्रूरता ने भारत को झकझोर दिया और वैश्विक समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तियानजिन शिखर सम्मेलन में जारी घोषणापत्र ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और दोहरे मापदंडों को खारिज करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक वैश्विक संकल्प को रेखांकित किया।
1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ का 25वां शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक क्षण बनकर उभरा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में तियानजिन घोषणापत्र जारी हुआ, जिसने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता को नया आयाम दिया। घोषणापत्र में कहा गया, “सदस्य देश 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कठोर निंदा करते हैं और पीड़ितों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करते हैं।” इस बयान का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब इसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में जारी किया गया, जिसके देश पर आतंकवाद को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं। भारत ने इस मंच पर अपनी बात को दृढ़ता और प्रभावशीलता के साथ रखा, जिससे वैश्विक समुदाय का समर्थन प्राप्त हुआ और आतंकवाद के खिलाफ एक सशक्त वैश्विक संदेश प्रसारित हुआ।
तियानजिन घोषणापत्र में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ संयुक्त वैश्विक संघर्ष की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया गया, जो भारत के दशकों पुराने सैद्धांतिक रुख को और मजबूती प्रदान करता है। विशेष रूप से, दोहरे मापदंडों को स्पष्ट रूप से खारिज करना एक ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा, “पहलगाम हमला न केवल भारत पर, बल्कि समस्त मानवता पर प्रहार था। आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार का दोहरा रवैया अस्वीकार्य है।” यह कड़ा संदेश उन देशों के लिए चेतावनी है, जो आतंकवाद को अपनी रणनीति का हथियार बनाते हैं। घोषणापत्र में यह स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कठोर निंदा होनी चाहिए, और इसके दोषियों, योजनाकारों व प्रायोजकों को कठिनतम सजा का सामना करना होगा। यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक विजय है। इसके साथ ही, घोषणापत्र में बलूचिस्तान के खुजदार और जाफर एक्सप्रेस हमलों की भी निंदा की गई, जो इस सत्य को रेखांकित करता है कि आतंकवाद एक साझा वैश्विक चुनौती है, जिसका मुकाबला सामूहिक संकल्प से ही संभव है।
एससीओ का वैश्विक मंच पर प्रभाव निर्विवाद है, क्योंकि यह विश्व की 42% आबादी और 24% भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। घोषणापत्र में सीमापार आतंकवाद पर विशेष बल देना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो लंबे समय से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। इसमें कहा गया, “आतंकवाद और चरमपंथ के खतरों से निपटने में संप्रभु राष्ट्रों और उनकी एजेंसियों की भूमिका सर्वोपरि है।” यह भारत के उस दृढ़ रुख का समर्थन करता है, जिसमें वह आतंकवाद को पोषित करने वाले देशों पर जवाबदेही थोपने की मांग करता है। घोषणापत्र ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया, जो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और एकजुटता को और सशक्त करता है। यह न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है।
तियानजिन घोषणापत्र में भारत की अग्रणी पहलों को प्रमुखता के साथ मान्यता दी गई, जो वैश्विक एकता और सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के मंत्र को दोहराते हुए घोषणापत्र ने वैश्विक एकजुटता के इस दर्शन को सशक्त रूप से प्रतिध्वनित किया। 3-5 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 5वां एससीओ स्टार्टअप फोरम और 21-22 मई 2025 को हुई 20वीं एससीओ थिंक टैंक बैठक की सराहना की गई, जो भारत की नवाचार और बौद्धिक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाता है। भारतीय विश्व मामलों की परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के तहत स्थापित एससीओ अध्ययन केंद्र को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैचारिक सहयोग के लिए विशेष प्रशंसा प्राप्त हुई। यह न केवल भारत की आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ लड़ाई को बल देता है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी उजागर करता है।
घोषणापत्र में गाजा में इजरायल के हमलों की कठोर निंदा शामिल की गई, जो वैश्विक मानवीय संकट के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। फिर भी, पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक एकजुटता भारत के लिए एक ऐतिहासिक कूटनीतिक विजय है। भारत ने इस मंच का उपयोग न केवल अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखने के लिए किया, बल्कि वैश्विक समुदाय को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट करने में भी अभूतपूर्व सफलता हासिल की। तियानजिन घोषणापत्र आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई का एक सशक्त और प्रेरक आह्वान है, जो भारत की कूटनीतिक शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन गया है। यह लड़ाई केवल भारत की नहीं, बल्कि समस्त मानवता की है, और यह घोषणापत्र उस साझा संकल्प का जीवंत दस्तावेज है।
- प्रो. आरके जैन “अरिजीत”, बड़वानी (मप्र)
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