काव्य :
शिक्षक
नन्हे-नन्हे कदम लेकर
हम जिनके चरणों में आए,
अंधकार भरी दुनिया में
वह दीपक बनकर राह दिखाएं,
जब नहीं आता कुछ हमको समझ
एक-एक अक्षर का ज्ञान कराते,
वही हमारे शिक्षक कहलाते II
माता-पिता के बाद जो
राह पर चलना सिखाते,
जीवन के हर मोड़ पर
सही-गलत की पहचान कराते,
कभी डांट तो कभी प्यार से हमें सिखाते
अंधकार से जो प्रकाश की ओर ले जाते,
वही हमारे शिक्षक कहलाते II
जब प्रतियोगिता लगने लगती जंग
बन जाते छात्रों का दाहिना अंग
ऐसे शिक्षक को शत-शत नमन,
नीव से मंजिल तक करते आवागमन
जिनकी सहायता से,
प्रत्येक छात्र प्राप्त कर विजय
अपने जीवन को सफल बनाता,
वही हमारे शिक्षक कहलाते II
- ज्योति यादव, प्रयागराज
Tags:
काव्य
.jpg)
