शिक्षण में शिक्षा का महत्व : शिक्षक सप्ताह के अंतर्गत शिक्षक दिवस मनाया गया
दिल्ली। भारतीय शिक्षण मंडल प्रांत दक्षिण दिल्ली द्वारा आरकेएलएम गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल बीडनपुरा करोल बाग़ दिल्ली में शिक्षक सप्ताह के अंतर्गत शिक्षक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अतिथि मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ भावना शुक्ल उपस्थित रही, स्कूल की प्राचार्य चित्रा टेकचंदानी, डॉ गौरी, विद्यालय के समस्त शिक्षक और विद्यार्थीयों की उपस्थिति रही।कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ.गौरी द्वारा ध्येय मन्त्र और ध्येय वाक्य से हुआ तत्पश्चात अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्चना और दीप प्रज्वलन किया गया। डॉ गौरी ने भारतीय शिक्षण मंडल का परिचय देते हुए मुख्य वक्ता डॉ. भावना शुक्ल को वक्तव्य के लिए आमंत्रित किया आपने वक्तव्य में सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन जी को नमन करते हुए कहा-
शिक्षक से ही मिल रही, शिक्षा को पहचान।
पांच सितंबर मान रहा, शिक्षक दिवस महान।
आपने शिक्षक और शिक्षण के महत्व को बताते हुए कहा है कि शिक्षा में शिक्षकों की अहम भूमिका है प्रत्येक समाज की आधारशिला शिक्षक से ही बनती है । कहा जाता है शिक्षक ही समाज का मार्गदर्शक होता है शिक्षक हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। शिक्षक का सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करता है और एक समाज में देश के लिए नई पीढ़ी का निर्माण करता है। देश के और समाज के निर्माण के लिए शिक्षा की महती आवश्यकता है। आपने व्यवहार और संस्कार के विषय में विद्यार्थियों को बताते हुए यह भी कहा कि -
भले मिले ना डिग्रियाँ,
अगर मिलें संस्कार।
जीवन में दिखता हमें,
पढ़ा लिखा व्यवहार।।
आपने बताया अगर हम ग़ौर करें कि 100 वर्षों में स्थिति बदली है उन प्रश्नों पर विचार करें एक समानांतर प्रश्न उठता है चाह,शिक्षा और वह कौन-सा परिवेश है जिसमें शिक्षा बदल रही है। आपने ऑनलाइन शिक्षा की भी बात की और विद्यार्थियों से कई सवाल जवाब हुए विद्यार्थियों ने भी अपने दृष्टिकोण से शिक्षा और शिक्षक के महत्व के विषय में बोला। डॉ. भावना ने अपने उद्बोधन में यह भी कहा कि-
शिक्षा ऐसी चाहिए, करें जगत में काम।
शिक्षक से ही बन रहा , राधाकृष्णन नाम।।
इस अवसर पर संस्था की प्राचार्य आदरणीय चित्रा जी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि-वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक का बहुत अधिक महत्व है और शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है बल्कि समाज के विकास की प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
विद्यालय की शिक्षिका रेनू जी ने भी अपने विचारों के माध्यम से विद्यार्थी और शिक्षक के बीच के संबंध और उनके महत्व के विषय में बताया। डॉ. गौरी ने कार्यक्रम का कुशलता पूर्ण संचालन किया और आपने भी शिक्षा-शिक्षक, व्यक्तित्व विकास, व्यवहार, संस्कार के विषय में अपने विचार व्यक्त किये और कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र से डॉ.गौरी ने किया। इस आयोजन की रूपरेखा भारतीय शिक्षण मंडल प्रांत दक्षिण दिल्ली के महामंत्री डॉ अनुराग अग्निहोत्री की थी।
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