ad

हास्य लघु कथा : बचपन की चाहतें - - डॉ मंजू लता , नोयेडा


 

हास्य लघु कथा : 

बचपन की चाहतें 

             दो छोटी लड़कियाँ आपस में बातें करती हैं। उम्र महज़ ग्यारह साल। मैं खड़ी उनकी बातों को सुनती रहती हूँ। मेरी उपस्थिति से वे अनभिज्ञ हैं। उन बच्चियों की छोटी-छोटी बच्चियों को देख मुझे लगा कितनी मासूम होती हैं। अभावों में पलने वाली।

एक ने दूसरी लड़की से कहा ---"सुन!एक बात बोलूं।

दूसरी ----"बोल ना"

पहली ---"बोल ना। बोलती क्यों नहीं? "

 पहली-----"मुझे न वो मिठाई वाला बहुत अच्छा लगता है। मैं उससे विवाह कर लूँ, तो कितना अच्छा होगा। "

दूसरी लड़की --------

"पागल है क्या?, उस मोटू से। तेरा दादा लगता है? तू उसकी नातिन जैसी। छीः कैसी बातें करती है"

पहली -----"तो क्या हुआ। मुझे मिठाई खाने के लिए रोज़ मिलेगा। ये क्या कम है। तू तो जानती है मुझे मिठाई कितना पसंद है। जब भी दुकानों में देखती हूँ, मेरा मन खाने को मचल उठता है।"

दूसरी------"तो खरीद के खा "

पहली----"पैसे कहाँ हैं"

दूसरी---"माँ से मांग ले"

पहली-----"माँ तो दिन भर लकड़ी बेच कर थोड़े पैसे लाती है। फ़िर उससे चावल और साग लाती है। हम चार भाई बहन, बाबू और माँ। छः लोगों को खाना ही माँ मुश्किल से जुटाती है। बाबू तो दारू पी के बीमार पड़ा है "

मैं जब भी माँ से मिठाई के लिए पैसे मांगती हूँ, माँ मुझे मारने दौड़ती है। कहती है-----"तू अकेली नहीं हैं कि तुझे ही खवाऊं। न ही मेरे पास इतने पैसे हैं। "

दूसरी---"तू जाने। तेरी बात मेरे समझ में नहीं आती "

पहली-----" बता ना। मैं गलत सोचती हूँ। तू बड़ी बुद्धू है। मैं तुझे भी तो खाने को दूँगी "

दूसरी----"चल हट। मैं नहीं खाती। तू ही खाना। जा--जा कर ले विवाह उस मोटे हलवाई से। देखा है उसका पेट। तेरा भी वैसा हो जाएगा "

पहली----"ऐसे क्यों बोलती हो "

दूसरी ------"और क्या बोलूँ? "

        शाम गहराने लगी है। धूप खिसकने लगी है। दोनों लड़कियाँ घर को चली गईं। मैं भी अपने घर को चली और रास्ते भर इन अभावों में पलने वाले बच्चों के बारे में सोचती रही। छोटी-छोटी ख्वाहिशेँ भी इनकी पूरी नहीं हो पाती।

 - डॉ मंजू लता , नोयेडा

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post