साहित्यकारों, पत्रकारों एवं स्वर साधकों ने आकाश चौहान को दी स्वरांजलि
मन्दसौर। नगर की सामाजिक, साहित्यिक एवं सुरसाधक समूह के वरिष्ठ पत्रकार श्री घनश्याम बटवाल, ब्रजेश जोशी, कविगण नंदकिशोर राठौर, नरेन्द्र त्रिवेदी, नरेन्द्र भावसार, अजीजुल्लाह खान खालिद, अजय डांगी, श्रीमती चंदा डांगी, श्रीमती चन्द्रकलासिंह, राजेन्द्र तिवारी, पंकज पंवार, आदर्श प्रजापति, आशीष मराठा, तेजकरण, हेमन्त कच्छावा, लालबहादुर श्रीवास्तव, हिमांशु वर्मा, मनीष कनोदिया, श्रीमती स्वाती रिछावरा, ईश्वर डांगी, राहुल राठौर ने वरिष्ठ पत्रकार स्व. आकाश चौहान (आज तक) को स्मरण कर गीतों के माध्यम से स्वरांजलि दी।
इस अवसर पर डॉ. बंटवाल ने कहा कि पत्रकारिता की दुनिया में आकाश चौहान कुशल पत्रकार थे उनकी त्वरित क्लिकिंग पावर जबरदस्त थी । आपने अपने नाम के अनुरूप पत्रकारिता के आकाश को छू लिया। श्री जोशी ने कहा कि आज तक के पत्रकार स्व. आकाश की अंचल की ह्यूमन ट्रेफिकिंग रिपोर्ट का ही असर था कि प्रशासन की कार्यवाही से कई बालिकाओं को अपराधियों के चुंगल से मुक्त कराया गया और वे आज पारिवारिक जीवन जी पा रही है।
इस अवसर पर आशीष मराठा ने ‘‘चिट्ठी न कोई संदेश, कहां तुम चले गये’’, नन्दकिशोर राठौर ने ‘‘ ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’’, आदर्श प्रजापति ने ‘‘जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मुकाम’’, तेजकरण ने ‘‘सांसों का कर्ज चुकाना है एक दिन‘‘, स्वाती रिछावरा ने ‘‘जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर‘‘, हिमांशु वर्मा ने ‘‘ ये ही जीवन है, इस जीवन का यही है रूप‘‘, लाल बहादुर श्रीवास्तव ने ‘‘हुई शाम उनका ख्याल आ गया’’, राहुल राठौर ने ‘‘मैं पल दो पल का शायर हूॅ’’ व मनीष कनोदिया ने ‘‘किस्मत का यही फसाना है, कभी हंसना कभी रोना है‘‘ गीत गाकर वरिष्ठ पत्रकार आकाश चौहान को स्वरांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र त्रिवेदी ने किया तथा आभार नरेन्द्र भावसार ने माना।
नन्दकिशोर राठौर

