ज्योतिष विचार :
साढ़े साती शनि 2026 में वर्ष पर्यन्त मीन रशि पर विचरण करेंगे
भोपाल । इस वर्ष 2026 ई. में वर्ष पर्यन्त शनिदेव मीन रशि पर विचरण करेंगे। जिसके प्रभाव से पूर्व की तरह कुंभ, मीन तथा मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। सिंह और धनु राशि वालों के लिए शनि की अढ़ैया चाल का प्रभाव होगा। शनि की साढ़ेसाती मेष राशि वालों के लिए चढ़ती हुई तथा मीन राशि वालों के लिए हृदय पर एव कुभ राश वालों के लिए उतरती हुई पैरों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा।
पं. विनोद गौतम ने बताया कि उपरोक्त प्रभाव वर्ष पर्यन्त तक रहेंगे। शनि जिस राशि में भ्रमणरत होते हैं उस राशि के आगे पीछे की राशि पर अपना शुभाशुभ प्रभाव देते हैं। शनि के अशुभ स्थिति में होने पर व्यापार, व्यवसाय, नौकरी, पदोन्नति में रुकावटें, हानि तथा निकट पारिवारिक संबंधियों से वाद-विवाद, न्यायालयीन परेशानी एवं स्वास्थ्यगत परेशानी, चिंता, तनाव एवं मुसीबतों की बारिश करा देता है। परन्तु शनि अनुकूल होने से सर्वसुख आर्थिक लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
अशुभ शनि शांति के उपाय
उपरोक्त शनि का विचार गोचर ग्रहों के आधार से है, फल का पूर्ण निर्धारण जन्म कालीन ग्रहों के आधार पर करना अनिवार्य है। जिनकी जन्म कुण्डली में शनि शुभफल प्रद हो अथवा अर्न्तदशा शुभ चल रही हो उनके लिए शनि का अशुभ फल कम होगा। जन्म कुंडली में शनि अशुभ ग्रहों से युक्त अशुभ स्थानों में हो तो साढ़ेसाती और अढ़ैया शनि चिंता, पीड़ा, धन हानि, कार्य में विघ्न नेष्ट फल दायक होता है। शनि के अनिष्ट फल के निवार्णार्थ छायादान, शनि मंत्र का जाप, हवन, हनुमत पूजा, अभिषेक, तेलयुक्त सिन्दूर समर्पण कर भक्तिपूर्वक शनिवार का व्रत, सप्तधान्य का दान, प्रति शनिवार को पीपल का पूजन करने तथा दीपक जलाने से शनि का अनिष्ट फल दूर होता है। अन्याय करने वालों का साथ न दें एवं अन्याय न करें। साढ़ेसाती अढ़ैया शनि का विचार जन्म कालीन स्पष्ट चन्द्रमा के अंशों से करना चाहिए। केवल राशि से साढ़ेसाती शनि का विचार नहीं होता शनि का बीज मंत्र: !! ú शं शनैश्चराय नम: !!
1. लोहे की कटोरी में तेल लेकर अपनी छाया उसमें देखकर वह तेल पांच शनिवार आक के पौधे पर डालें। पांचवे शनिवार को तेल चढ़ाने के बाद तेल व कटोरी वही दबा दें। ऊँ ऐं हृीं शनैश्चराय नम: मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।
2. काले घोड़ेे के नाल की अंगूठी धारण करना लाभकारी होगा।
3. काला कपड़ा, उड़द की दाल, लोहा, सरसों का तेल, काले फूल का दान, शनि दशा में शुभ प्रभाव कारी माना गया है।
4. शिवजी को तांबे का सर्प चढ़ाना लाभकारी होता है।
5. शनि स्त्रोत का शनिवार को जाप करना शनि के कुप्रभावों से रक्षा करता है।
7. रुमाल के आकार वाले काले कपड़े में पांच काली वस्तुएं जैसे लोहा, उड़द, कोयला, काजल, तिल, काली मिर्च आदि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रखकर पोटली बनाकर तीन बार सिर से घुमाकर शनिवार के दिन सूर्यास्त के बाद जल में विसर्जन करें।
8. शनिश्चरी अमावस्या, शनि जयंती एवं हनुमान जयंती आदि अवसरों पर यथायोग ब्राह्मण से शनि ग्रह की शांति विधान कराने से शनि से संबंधित पीड़ा समाप्त होती है। शनि की अंतर्दशा, महादशा में भी शनि शांति करवाने से लाभ होता है।
विशेष - जिन राशियों में शनि की साढ़ेसाती एवं अढैया का प्रभाव अथवा शनि की दशा का प्रभाव हो उन राशि वालों को श्रावण माह में शिव अभिषेक महामृत्युंजय जाप के साथ शनि की शांति अवश्य कराना चाहिए एवं वाहन से सावधानी रखें, अन्याय न करें।
ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम
ज्योतिष मठ संस्थान, ईएम-219, नेहरू नगर, भोपाल
मोबा. 9827322068
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