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काव्य : लो आ गया ऋतुराज बसंत.. - मनमोहन भटनागर, झांसी (उत्तर प्रदेश)


 काव्य : 

लो आ गया ऋतुराज बसंत....!


ली अंगड़ाई प्रकृति ने.........

झूमें आम - पुष्पित डाली,

रंगे खेत पीली सरसों से चारों ओर भरी हरियाली....!


खिली धूप सब गांव - गली छंट गई सारी धुंध......

महक उठे सब छत-आंगन आल्हादित मन के संग.....!


फूलों से श्रृंगारित चना- मटर - गेहूं  अपनी धुन में मस्त.. झूमे हवा संग जैसे कोई मलंग.....!

पक्षी कलरव-कोयल की मीठी-मीठी तान उसनींदे को कराती मधुर भोर का भान..!


टेसू - पलाश के फूलों का कर मोहक श्रृंगार......

जंगल -जंगल दमक रहे संग मस्त बसंती बयार..….!


देखो न धरती भी सजधज कितना.....

इतरायी है.... उस पर हरियाली जो छायी है।


बासंतिक परिवेश में हो चूर..... मलयज समीर बिखेर रही........ मदमस्त सुगंध चहुंओर...।


हवा का रुख बदलते ही... 

देख मौसमी राग- रंग.... कोई मतवाला निकल चला... बेपरवाह राहों पर...... अंजानी मंजिल की ओर..... लेकर मन अतरंग...।


ज्ञान की देवी मां सरस्वती को भी खूब भाता- लुभाता है..... बसंत।

वातावरण में गुंजित होते उनके स्तुति छंद....!


लो आ गया ऋतुराज बसंत.......।


 - मनमोहन भटनागर,

    झांसी (उत्तर प्रदेश)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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