काव्य :
मां शारदे
आई बादलों से पार
लेकर वीणा की झंकार
माता कमलासन विराज
मां शारदे पधारी आज
श्वेत वस्त्रों से सुशोभित
गले में पहना कुंदन हार
मुखड़ा दमके सुरज लाल
फैलाए ज्ञान का प्रकाश
वर हरदम देने को तैयार
मां शारदे पधारी आज
आई खुशियों की बौछार
जैसे अमृत बरसा आज
पूरी होगी सबकी आस
भरेंगे ज्ञान के भंडार
लेकर ध्यान का आधार
न रहेगा अब पापाचार
बहेगी शांति की रसधार
मां शारदे पधारी आज।
- चन्दा डांगी रेकी ग्रेंडमास्टर
मंदसौर मध्यप्रदेश
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