सरोकार :
इन्दौर के भागीरथपुरा में मौत का पानी
कारणों की पड़ताल कर सख्त कदम उठाना जरूरी
- डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
देश के सबसे स्वच्छ शहर इन्दौर में गंदे और जहरीले पानी से 16 लोग मारे गए। उनके लिए पीने का पानी मौत का पानी बन गया। इन्दौर के लिए यह एक कलंक है। पीने का पानी मौत का पानी क्यों और कैसे बना ? इसके कारणों की पड़ताल करना जरूरी है और यह भी जरूरी है कि अब कभी ऐसा नहीं हो। इसके लिए ठोस और सख्त कदम उठाए जाना जरूरी है।
मध्यप्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों से मिलकर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त की और इन्दौर नगर निगम के आयुक्त श्री दिलीप कुमार यादव को आयुक्त पद से हटाकर भोपाल भेज दिया है। इसके साथ ही अपर आयुक्त श्री रोहित सिसोनिया और नर्मदा प्रोजेक्ट के 13 साल से प्रभारी अधीक्षण मंत्री श्री संदीप श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है। किन्तु इतना ही काफी नहीं है। हर स्तर पर हुई लापरवाही की पड़ताल कर हर स्तर के दोषी व्यक्तियों को भी सजा मिलनी ही चाहिये।
इंदौर के भागीरथपुरा में पीने के पानी की जब जाँच की गई तो पहली रिपोर्ट 4 दिन बाद आई। उस रिपोर्ट में अनेक खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए, जिसने पीने के पानी को मौत का पानी बना दिया। जाँच में जो प्रमुख खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए, वे सब मौत के प्रमुख कारण है।
दूषित पानी की जाँच में प्रमुख रूप से 6 खतरनाक बैक्टीरिया मिले, वे इस प्रकार हैं-फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, ई-कोलाई, स्यूडोमोनास एरूजिनोसा, विब्रियो स्पीशीज, क्लेबसेला स्पीशीज, सिट्रोबेक्टर स्पीशीज। इन सभी बैक्टीरियाओं ने पीने के पानी में गटर के दूषित पानी के मिलने से पानी को जहरीला बना दिया। इनसे दस्त, उल्टी, पेटदर्द, फेफड़े और खून में इन्फेक्शन, हैजा, डिहाइड्रेशन, फेफड़े, मूत्र मार्ग और पेट में संक्रमण होता है, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके लिए खतरनाक होते हैं।
जहरीले पानी को पीने के कारण जहाँ 16 अकाल मौतें हो गई, वहीं 201 मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं और 32 की हालत गंभीर है। 71 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अभी तक एक हजार से अधिक मरीजों की जाँच हो चुकी है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज जारी है। दुख की बात तो यह है कि अभी भी दूषित पानी के लिए मुख्य रूप से दोषी नगर निगम ने जबलपुर हाईकोर्ट में गंदे पानी से सिर्फ 4 लोगों की मौत को स्वीकार किया है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रश्न भी उठाया कि जो 16 लोग मारे गए, उनकी जान कैसे गई ? विभाग लिपापोती में लगा है। यह नहीं होना चाहिए। सच सामने आना ही चाहिए।
इन्दौर नगर निगम क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौत की खबर प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय अखबारों में भी आ गई है। इन्दौर ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर शहर में पीने के पानी में नाली का पानी मिलने की खबर मीडिया में आए दिन आती रहती है। उदाहरण के लिए उज्जैन के आदर्श नगर और महाश्वेता नगर में भी पीने के पानी में गटर का गंदा पानी मिल रहा है जिसे नागरिक पीने के लिए अभिशप्त है। अनेक जगह पाईप लाईन लिकेज होने से वह पीने के पानी के साथ मिल रहा है। अन्य शहरों में भी ऐसी स्थिति होने की संभावना है। इसलिए प्रदेश के सभी शहरों में एक विशेष अभियान चलाकर पीने के पानी की लाईनों की सघन जाँच की जानी चाहिए और जहाँ भी नाली का पानी पीने के पानी में मिल रहा है, उसे तुरंत बंद कर सुधार कार्य किया जाना चाहिए। यह नहीं होगा तो फिर किसी दिन किसी अन्य शहर से ऐसे ही मौत के पानी की खबर आयेगी। ऐसी स्थिति पर नियंत्रण होना बहुत जरूरी है।
हाल ही में एक बुरी खबर आई है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि हमारे देश का लगभग 70 प्रतिशत पीने का पानी दूषित है। पानी की गुणवत्ता में भारत 122 देशों में 120वें पायदान पर है। यानी नीचे से तीसरे नम्बर पर हमारी स्थिति है। यही नहीं रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि भारत में 60 करोड़ लोग अत्यधिक जल संकट का सामना कर रहे हैं। हर साल करीब 2 लाख लोगों की मौत गंदे पानी के कारण होती है। उक्त रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2030 तक देश में पानी की माँग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी होने की संभावना है। इससे करोड़ों लोगों के सामने और ज्यादा बड़ा संकट खड़ा होने वाला है !
उक्त रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सन 2005 से 2022 के बीच भारत में जलजनित बीमारियों के 20.98 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए है। ये वे मामले हैं जो दर्ज हुए हैं। इससे कई अधिक मामले ऐसे हैं जो दर्ज ही नहीं होने पाए। दूषित पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों में डायरिया, हैजा, टाइफाइड और वायरल हेपेटाइटिस शामिल है। सर्वाधिक 86 प्रतिशत केस डायरिया के पाए गए हैं। टाइफाइड दूसरे नम्बर पर रहा। पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश में हुई मौतों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। यह अत्यन्त गंभीर मामला है।
उक्त कठिन परिस्थिति में केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को चाहिए कि वे पीने के पानी में गंदा पानी नहीं मिल पाए, इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर विशेष अभियान चलाया जाए। अभियान के दौरान जहाँ भी जरूरी हो, वहाँ तुरंत सुधार कार्य किया जाना आवश्यक है। यह नहीं होगा तो फिर इन्दौर जैसा प्रकरण देश के अन्य शहरों में भी होने की पूरी संभावना है। यह बहुत बड़ा संकट है। इसे दूर करना केन्द्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
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