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रिपोर्ट : अश्वगंधा नये वैश्विक क्षैतिज पर - सत्य प्रकाश , नयी दिल्ली


 

रिपोर्ट :

अश्वगंधा नये वैश्विक क्षैतिज पर 

- सत्य प्रकाश , नयी दिल्ली

योग और आयुर्वेद को वैश्विक क्षैतिज पर पहुंचाने के साथ ही भारत ने पारंपरिक औषधि अश्वगंधा से विश्व विजय की तैयारी आरंभ कर दी है। पश्चिम देशों में जीवन शैली में बदलाव और प्रतिरोधी क्षमता की संकल्पना के जोर पकडने से यूरोप, अमेरिका और पूर्वी एशिया देशों के देशों में भारतीय परंपरागत चिकित्सा के प्रति खासा उत्साह दिख रहा है। कोविड-19 के दौरान अश्वगंधा की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ गई और इसका कई देशों में उपयोग शुरू हो गया। भारत अपने शोध और साक्ष्य आधारित सत्यापन के माध्यम से अश्वगंधा को विश्वसनीय तरीके से आगे बढ़ा रहा है। भारत पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि कोरोना काल में खरी उतरी जड़ी-बूटियों को वैश्विक जन स्वास्थ्य का हिस्सा बनाया जाए।

आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण रसायन जड़ी बूटियों में से एक अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा) अपनी अनुकूलनीय, स्नायु सुरक्षा एवं प्रतिरक्षा गुणों के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर मान्यता प्राप्त कर रही है। विशेषज्ञ इसके समर्थन के लिए कठोर पूर्व-नैदानिक एवं नैदानिक अनुसंधान, सुरक्षा मूल्यांकन, औषधि सतर्कता एवं मानकीकरण के महत्व पर जोर दे रहे है। भारत सरकार ने अश्वगंधा के वैश्विक प्रचार-प्रसार और शोध के लिए विश्व अश्वगंधा परिषद का गठन किया है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर अश्वगंधा को वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर लाने का प्रयास करती है। यह अश्वगंधा को वैश्विक जन स्वास्थ्य का हिस्सा बनाने और तनाव एवं प्रतिरक्षा के लिए इसके उपयोग और अश्वगंधा उत्पादों के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढावा देती है।

राष्ट्रीय राजधानी नयी दिल्ली में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन में 16 देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों से भारत ने पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व को सुदढ़ किया। इसके साथ ही पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के लिए डब्ल्यूएचओ की वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 में साक्ष्य-आधारित निवेश, मजबूत विनियमन और अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था का आह्वान किया गया। कोविड काल से ही भारत वैश्विक स्वास्थ्य संरचना के लिए एक न्यायसंगत, अनुकूल और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका पर जोर देता रहा है।

वास्तव में 21वीं सदी में जीवन में संतुलन बनाए रखने की चुनौती और भी बड़ी होने वाली है। एआई और रोबोटिक्स के साथ नई तकनीकी युग का आगमन मानव इतिहास में सबसे बड़ा परिवर्तन है और आने वाले वर्षों में जीवन शैली अभूतपूर्व तरीकों से बदल जाएगी। जीवनशैली में ऐसे अचानक परिवर्तन तथा शारीरिक श्रम के बिना संसाधनों और सुविधाओं की उपलब्धता, मानव शरीर के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां पैदा करेगी। सदियों से अश्वगंधा भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में उपयोग की जा रही है। एक समय ऐसी धारणा थी कि पारंपरिक चिकित्सा केवल स्वास्थ्य या जीवनशैली तक ही सीमित है, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा गंभीर परिस्थितियों में भी प्रभावी भूमिका निभा सकती है और भारत इस दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

भारत ने पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से ब्राजील, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात, मैक्सिको, वियतनाम, भूटान, सूरीनाम, थाईलैंड, घाना और क्यूबा के प्रतिनिधिमंडलों के साथ सोलह द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके साथ ही भारत और क्यूबा के बीच अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) को शामिल करते हुए संस्थान-स्तरीय समझौता ज्ञापन किया गया जिसमें आयुर्वेद में पाठ्यक्रम विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य एकीकरण, पंचकर्म प्रशिक्षण और नियामक सामंजस्य में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की गई है।

डब्ल्यूएचओ ने गुजरात के जामनगर में वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किया है। केंद्र की प्रतिष्ठा और प्रभाव वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है। चिकित्सा विज्ञान और समग्र स्वास्थ्य के भविष्य को बदल सकती हैं। केंद्र ने संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, नियमों को सरल बनाने और प्रशिक्षण का उन्नयन करने एवं ज्ञान साझा करने के लिए नए रास्ते खोले हैं। इस तरह का सहयोग भविष्य में पारंपरिक चिकित्सा को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

भारत के प्रयासों और 175 से अधिक देशों के समर्थन से, संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। हाल के वर्षों में योग विश्व के हर कोने तक पहुंच गया है। इसके अलावा पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय की शुरुआत की गयी है। यह पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित वैज्ञानिक डेटा और नीति दस्तावेजों को एक ही स्थान पर संरक्षित करेगा। इससे जानकारी को समान रूप से हर देश तक पहुंचाना आसान होगा। दिल्ली में डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया गया है। यह कार्यालय अनुसंधान, विनियमन और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। 

नयी दिल्ली में नए डब्ल्यूएचओ-दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन किया गया है, जिसमें डब्ल्यूएचओ का भारत कार्यालय भी स्थित होगा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ भारत की साझेदारी की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को रेखांकित करता है।


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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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