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काव्य : मलयानिल सी श्वास - डा.नीलम ,अजमेर


 काव्य : 

मलयानिल सी श्वास


 लबों के प्याले

लबों से टकरा गये

सदियों की सोई

प्यासी प्रीत 

ऊर में जगा गये

टकराई जब साँसें 

साँसों से

मलयानिल सी साँसें

कर गये।


चराग से

जलने-बुझने लगे

इश्क की राहों में

तन थरथरा कर

रह गये,

यक- ब- यक तार

धड़कनों में

बज उठे,ख्वाब बिन

पंख के उड़ने लगे।


तन बेसुध

रुह कंजरी होकर

दिल के गलियारों में

नाचने लगी

पलकों की छाँव तले

सपनो ने

खटिया बिछा ली।


      - डा.नीलम ,अजमेर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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