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पुस्तक चर्चा: "जीवन मित्र" (समीक्षा संग्रह) - चर्चा विवेक रंजन श्रीवास्तव


 

पुस्तक चर्चा: 

"जीवन मित्र"

(समीक्षा संग्रह)


समीक्षक एवं सम्पादक: डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

प्रकाशक: द वर्ल्डस्विग प्रकाशन (आईएसओ 9001:2015 प्रमाणित)

ISBN: 978-81-993233-9-1

मूल्य: ₹249/-

पृष्ठ संख्या: 158

प्रकाशन वर्ष: 2025


"जीवन मित्र" डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार' द्वारा संपादित सार्थक समीक्षा संग्रह है जो पुस्तकों को मानव जीवन का सच्चा साथी मानने की अवधारणा को पुष्ट करता है। सामान्यतः जहां पुस्तकें उलट पलट कर रख देने की सामान्य प्रवृत्ति होती है, डॉ दुर्गा सिंहा जी ने ढेरों पुस्तकों को गम्भीरता से पढ़ा , उन पर विशद सार गर्भित  समीक्षा लिखी हैं। ये समीक्षाएं निश्चित ही यत्र तत्र प्रकाशित भी हुई हैं। तथा संबंधित किताबों के लेखकों के पास हैं।सोशल मीडिया पर भी बिखरे स्वरूप में संग्रहित हैं। किन्तु इसे डॉ दुर्गा सिंहा जी का पुस्तक प्रेम ही कहा जायेगा कि उन्होंने इन किताबों पर उनके द्वारा की गई समीक्षाओं को एक ही पुस्तक जीवन मित्र में प्रकाशित किया है। 

संग्रह विविध विधाओं की 32 पुस्तकों की गहन समीक्षाओं का  संकलन है। अन्य कई किताबें इस तरह की पढ़ने मिलती हैं, स्वयं मेरी पुस्तक "बात किताब की " मेरे स्तंभ पुस्तक चर्चा से चयनित किताबों की चर्चा का संकलन है। जब इस तरह का संकलन प्रकाशित होता है तो वह उन चर्चित किताबों के लेखकों के लिए एक स्थाई संपदा प्रमाणित होता है। 

लेखिका की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे प्रत्येक पुस्तक को केवल एक साहित्यिक कृति के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत मित्र के रूप में देखती हैं। उनकी समीक्षाओं में तकनीकी विश्लेषण के साथ-साथ व्यक्तिगत अनुभूतियों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। प्रत्येक समीक्षा में लेखिका ने पुस्तक के मूल संदेश, लेखक के उद्देश्य, भाषा शैली और सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला है।

इस संग्रह में श्री प्रमोद शंकर मिश्र के काव्य संग्रह "खोल दो न वातायन" से लेकर "बेटी हिन्दुस्तान की", "मनिहारिन", "मनस्विनी" जैसी नारी केंद्रित रचनाओं  की समीक्षाएँ शामिल हैं। नारी चेतना, सामाजिक विषमता, आर्थिक असमानता, मानवीय संवेदनाओं और जीवन संघर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित पुस्तकों का विशेष समावेश इसे और भी प्रासंगिक बनाता है।

लेखिका की भाषा सरल, सहज और प्रवाहमय है जो सामान्य पाठक को भी आसानी से जोड़ती है। हर समीक्षा के अंत में दिए गए व्यक्तिगत संदेश पाठक को उस पुस्तक को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

यह पुस्तक न केवल साहित्यिक समीक्षा का एक उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि यह पाठकों को विभिन्न विधाओं से परिचित कराने और सार्थक साहित्य की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। जीवन में निराशा, संघर्ष या दुविधा के समय यह संग्रह सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह संकलन एक बहुत महत्वपूर्ण कृति है क्योंकि इसमें मेरे पानी के महत्व पर मेरे पुरस्कृत लंबे नाटक जलनाद की डॉ दुर्गा सिंहा जी द्वारा की गई महत्वपूर्ण समीक्षा भी शामिल है।

"जीवन मित्र" हिंदी साहित्य प्रेमियों और गंभीर पाठकों के लिए एक  संदर्भ ग्रंथ है। यह पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि पुस्तकें वास्तव में हमारी सच्ची मित्र होती हैं। यह नए समीक्षकों के लिए दिशा दर्शक समीक्षा संग्रह है।

- चर्चा विवेक रंजन श्रीवास्तव

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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