स्टेट बैंक साहित्य कला परिषद एवं दुष्यंत संग्रहालय के फागोत्सव में श्रोता आनंद से सराबोर हुए
“देश में दुष्यंत संग्रहालय का नाम अग्रणी है। एक माह में यहाँ बीस कार्यक्रम होते हैं। डॉक्टर शैलजा सक्सेना और जवाहर कर्णावट जी को हिंदी को दुनिया में फैलाने का श्रेय दिया जाना चाहिए।” - नरेंद्र दीपक
होली का त्यौहार आज के युद्धरत और विद्वेषपूर्ण समाज को एकता भाईचारे, प्रेम, शांति एवं सद्भाव का संदेश देता है, इसकी आज बहुत आवश्यकता है – गोकुल सोनी
अपनी भूमि पर प्रेम का उत्सव मनाने का यह अवसर अद्वितीय है। भारत हमारी जड़ें हैं। पतझड़ पत्तों पर आता जड़ों पर नहीं। मैं आज अपनी जड़ों से मिल रही हूँ - डॉ शैलजा सक्सेना
“होली जैसा त्योहार सिर्फ भारत में ही हो सकता है, जिसमें लोग अपने अहम को पिघला कर एक स्तर पर आकर एक रंग में मस्त हो जाते हैं ” - सुरेश पटवा
भोपाल। स्टेट बैंक साहित्य एवं कला परिषद, भोपाल एवं दुष्यंत संग्रहालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में राज सदन में रंगारंग फागोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नरेंद्र दीपक ने की मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी राइटर्स गिल्ड "कनाडा" की अध्यक्ष डॉ शैलजा सक्सेना, विशेष अतिथि श्री जवाहर कर्णावत, सारस्वत अतिथि "लंदन" से पधारी वातायन संस्था की संस्थापक "सुश्री दिव्या माथुर", दिल्ली से पधारे श्री अनिल जोशी, "स्टेट बैंक साहित्य एवं कला परिषद" के अध्यक्ष श्री गोकुल सोनी, संयोजक श्री सुरेश पटवा भी मंचासीन रहे। सफल संचालन विशाखा राजुरकर ने किया।
करुणा राजुरकर द्वारा स्वागत उद्बोधन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रथम भाग में लोकगीत गायिका रीता बेन और साथियों ने सुमधुर होली एवं फागुन के गीतों से समां बांध दिया उसके बाद में पुष्पलता शर्मा द्वारा फाग गीतों की प्रस्तुति की गई।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष श्री गोकुल सोनी ने कहा कि होली का त्यौहार आज के युद्धरत और विद्वेषपूर्ण समाज को एकता भाईचारे, प्रेम, शांति एवं सद्भाव का संदेश देता है। उन्होंने सुंदर फाग गीत "फागुन फागुन मनवा, देखो खूब मची हुड़दंग," सुनकर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। संयोजक श्री सुरेश पटवा ने इस अवसर पर कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि “होली जैसा त्योहार सिर्फ भारत में ही हो सकता है, जिसमें लोग अपने अहम को पिघला कर एक स्तर पर आ एक रंग में मस्त हो जाते हैं।”
अध्यक्षता कर रहे श्री नरेंद्र दीपक ने अपने उद्बोधन में कहा कि “देश में दुष्यंत संग्रहालय का नाम अग्रणी है। एक माह में यहाँ बीस कार्यक्रम होते हैं। डॉक्टर शैलजा सक्सेना और जवाहर कर्णावट जी को हिंदी को दुनिया में फैलाने का श्रेय दिया जाना चाहिए।”
मुख्य अतिथि श्री कर्णावत ने कहा कि आज दुष्यंत संग्रहालय में अंतरराष्ट्रीय होलिका मंच सजा है। विशेष अतिथि डॉ शैलजा सक्सेना ने कहा कि हमको अपनी भूमि पर प्रेम का उत्सव मनाने का अवसर अद्वितीय है। भारत हमारी जड़ें हैं। पतझड़ पत्तों पर आता जड़ों पर नहीं। मैं आज अपनी जड़ों से मिल रही हूँ। उन्होंने “आज फिर गोधूली बेला का प्रहर पूछता मुझसे” रचना का पाठ किया। सारस्वत अतिथि दिव्य माथुर ने शांति निकेतन में फाल्गुन उत्सव के अनुभव साझा किए। उन्होंने “दस्तक भी बिना दिए जब कोई घुसा चाहे मन में” कविता सुनाई। श्री अनिल जोशी ने कहा कि भोपाल हिंदी की राजधानी है। हिंदी को दुनिया भर में ले जाने कार्य जिन्होंने किया है। वे इस मंच पर अतिथि हैं।
होली एक जीवन दर्शन है। उन्होंने “हैरान परेशान यह हिंदुस्तान है ये ओंठ तो अपने हैं पर किसकी जुबान है” रचना का पाठ किया।
लक्ष्मीकांत जावणे ने “अलख जागी रानी तोरे जोबना”, मनोज गुप्ता ने “होली आज मनायें कैसे कोई दामन बेदाग नहीं”, श्री दीपक पंडित ने “राधा के संग खेलें होली संग जी”, दिनेश प्रभात ने “ले के तुम चले आना फिर गुलाल होली पर”, प्रदीप श्रीवास्तव ने “सारा चेहरा ढका हुआ है”, डॉक्टर आदित्य गुप्ता ने “रंग दी चुनरिया रंग दी चोली”, मनीष श्रीवास्तव बादल ने “फागुन ओर हर्षित हुआ सतरंगी आकाश”, कैलाश मेश्राम ने “रंगीला दामन है छबीला तनमन है”, विशाखा राजुरकर ने “अब तुम मौसम भी बन चुके हो”, डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद जी ने “कितना प्यारा कितना क़ातिल होली का मौसम”, श्री राजेंद्र शर्मा "अक्षर" ने “आदमी को कैसा बनाया”, श्री दीपक शुक्ला "दनादन" ने ““बमचिक बम बम”, कमल सिंह कमल ने “जीवन की इन हसी वादियों में”, डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद ने “श्री वी के श्रीवास्तव ने “होली को आवन देख सूखी री”, रचनाएं सुनाईं।
अंत में श्री मनोज गुप्ता द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर भोपाल एवं भोपाल के बाहर से पधारे अनेक साहित्य प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दी।
करुणा राजुरकर
सचिव, दुष्यंत स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, भोपाल
.jpg)
