ग्रहण ज्ञान : फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा होली में चंद्र ग्रहण
इसके पूर्व 2007 को एवं 1979 को फाल्गुन शुक्र पूर्णिमा होली में चंद्र ग्रहण था
आगे होली की पूर्णिमा में सन 2043 ई में ग्रहण पड़ेगा ,लगातार तीन ग्रहण पड़ने से बनेगा,,त्रि ग्रहण योग
भोपाल। होली की पूर्णिमा पर लगने वाला ग्रहण हमेशा धुड़ेली एवं चल समारोह को प्रभावित करता है। कारण यह है कि ग्रहण एवं सूतक काल में देवताओं पर कष्ट रहता है ,अतः हम उत्साह कैसे मान सकते हैं इस कारण यह उमंग,उत्साह का त्यौहार ग्रहण के दूसरे दिन मनाया जाता है। मंदिरों के पट बंद होने से देवताओं पर । होली की पहली राख, रंग, गुलाल अर्पित नहीं हो पता एवं होली की शुरुआत भी नहीं हो पाती है इस कारण ग्रहण समाप्ति के पश्चात ही होलिका उत्सव प्रारंभ होता है।
ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया इसके पूर्व भी फाल्गुन शुक्ल होली पूर्णिमा को ग्रहण पड़े थे। 3 मार्च 2007 ई एवं 13 मार्च 19 79 ई में भी होली पूर्णिमा पर ग्रहण पड़ा था अब 3 मार्च 2026 को एक बार पुनः होली की पूर्णिमा पर ग्रहण पड़ रहा है, इसके पश्चात 25 मार्च 2043 ई को होली की पूर्णिमा पर ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण होगा।
पंडित गौतम के अनुसार ग्रहण हमेशा नाम के अनुसार कार्यों में ग्रहण लगने वाले होते हैं ग्रहण के प्रभाव से प्राकृतिक प्रकोप भूकंप आदि की स्थितियां बनती हैं। वर्तमान समय पर ग्रह स्थिति भी अनुकूल नहीं है वर्तमान ग्रह स्थिति को देखते हुए एवं एक माह में तीन ग्रहण की स्थिति बनने से विश्व में तनाव संकट का वातावरण रहेगा । त्रि ग्रहण योग ।
पंडित विनोद गौतम के अनुसार यह योग बहुत दुर्लभ योग है जब लगातार तीन ग्रहण पढ़ते हैं तब यह त्रिग्रहण योग बनता है ।इसके पूर्व 17 फरवरी को ग्रहण पड़ा था, फिर 3 मार्च, और आगामी 19 मार्च को आंशिक सूर्य ग्रहण पड़ेगा । एक माह में तीन ग्रहण यह खतरे की घंटी है एक माह में तीन ग्रहण पढ़ना, भले ही ग्रहण कहीं भी दृश्य हो परंतु प्राकृतिक वातावरण में हलचल मचाने वाला होता है अतः सावधानी की आवश्यकता है क्योंकि ग्रह भी संकटकाल की ओर लगातार बढ़ रहे हैं आगे स्थिति और भी विकराल हो सकती है जब एक ही राशि मीन में सात ग्रह इकट्ठे होंगे , यह स्थिति 1971 और 62 ईस्वी में बनी थी अतः हम सभी को सावधानी के साथ एक जुड़ता की आवश्यकता है।
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