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व्यंग्य : सिलेण्डर ने नाक कटवा दी -डॉ राजीव कुमार पाण्डेय,गाजियाबाद


 

व्यंग्य : 

सिलेण्डर ने नाक कटवा दी

         उन्नत ललाट ,उचके हुए कंधे,लम्बी कद काठी,रौबदार मूँछे, बगबगाता हुआ क्रीजदार  कुर्ता पायजामा,हाथ में मंहगी वाली घड़ी, पैरों में फैशनेबल जूतियां, गले में  मोटी पट्टी वाला गमछा, सिर पर नुकीली टोपी धारण किये हुए अपनी कोठी के बाहर लोन में कुर्सी पर विराजमान कस्बे के प्रतिष्ठित चौधरी सुल्तान सिंह सामने रखा हुआ हुक्का गुड़गुड़ाते हुए बार-बार अपनी हाथ की घड़ी पर नज़र डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था की सज-धजकर कहीं जाना  चाहते हैं या किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहें हैं। उन्होंने अपनी जेब से महंगा वाला आई फोन निकाला और गांव के नाई को  फोन मिलाते हुए बोले, "क्या हुआ महुआ,मैं तो बहुत देर से प्रतीक्षा  कर रहा हूँ ।"

 राम राम करते हुए महुआ  बोला " बस अभी आया चौधरी साहब। लड़की वाले आ गए हैं,उन्हें लेकर ही आ रहा हूँ।"

 चौधरी साहब सगर्व  मूंछों ही मूंछों में मुस्कुराए कि आज उनके लड़के के लिए रिश्ते वाले आ रहे हैं । उन्होंने इधर-उधर देखा सामने लगी  मेज पर स्वागत के लिये रखे गए सामान  पर नजर डाली कोई कमी तो नजर नहीं आ रही है।  फिर आशस्त  होकर बैठ गए चलो सब ठीक लग रहा है। नौकर भी पूरी शिद्दत के साथ काम में लगे हुए थे। थोड़ी देर के उपरांत महुआ  के साथ आठ दस  लोग दो गाड़ियों में आये। गाड़ियां बड़ी मंहगी प्रतीत हो रहीं थी ।  द्वार के सामने आकर रुकी गाड़ियों में से  सभी लोग उतर कर आये और आते ही चौधरी साहब को प्रणाम किया । चौधरी साहब भी अपने कुर्सी से खड़े होकर सभी स्वागत की मुद्रा में सामने पड़ी कुर्सियों की तरफ बैठने के लिये  इशारा  करते हुए कहा "आओ बैठो चौधरी सुल्तान सिंह की हवेली पर  आप सभी का हार्दिक स्वागत है ।" 

तभी अपने नौकरों को आवाज लगाते हुए,"कहा रामू - श्यामू कहाँ हो? आओ ये हमारे अतिथि, रिश्ते वाले  आये हैं स्वागत करो ।"

 फिर क्या  था! दोनों नौकर लड़के का छोटा भाई स्वागत के लिए दौड़ पड़े,कोई पानी लाता, कोई मिठाई लाता, कोई नमकीन लाया,विभिन्न प्रकार कटोरियों में ड्राई फ्रूट  काजू,बादाम,पिश्ता सजाए गए। कोल्डड्रिंक, मिल्क शेक,जूस आदि की उत्तम व्यवस्था की गई। स्वागत की पूरी भव्य तैयारी  थी,कोई कसर नहीं छोड़ी गई।  

जब जलपान आदि हो गया तो बृहद कोठी  दिखाई गई ,घरबार के बारे  में बातें हुईं।लड़के को बुलाया गया सब कुछ बहुत अच्छा था,लडका भी बहुत सुंदर, होशियार, काबिल, नौकरी से लगा हुआ था। लड़की वालों को सब कुछ पसंद आ गया। वो रिश्ता तय करने के लिये भी अपना मन बना चुके थे। ऐसा परिवार बार-बार नहीं मिलता है।

लड़की वालों में से एक व्यक्ति बोल पड़ा,"चौधरी साहब आपके स्वागत व्हवहार से हम लोग बहुत खुश है,लड़का भी हमें पसन्द आ गया है। अब आप पण्डित जी को बुलाओ और रिश्ता पक्का कर लीजिए। हम लोग आपके आतिथ्य से बहुत प्रसन्न हैं । पेट भी भर गया है अब खाने के चक्कर में मत पड़िये । और हाँ   जब तक पण्डित जी आएं तब तक एक एक कप चाय ही बनवा लीजिये।"

चौधरी साहब के चेहरे का रॉब फीका पड़ने लगा। बाजार से मंगाकर कुछ भी खिला सकता हूँ लेकिन  चाय---सिलेंडर आज ही खत्म हुआ था, अब चाय कैसे बनवाई जाए ये तो धर्म संकट,जब सामने से ही कोई मांग कर रहा हो,मना भी कैसे करें। अब चौधरी साहब बगलें झांकते हुए रामू से बोले,"जाओ बढ़िया सी चाय बनाकर लाओ मेहमानों के लिये।"

रामू दौड़ता हुआ अपने मालिक के पास आकर बोला ,"साहब सिलेंडर अभी  खत्म हो गया है। छोटे बाबू पूरे शहर के चक्कर लगाकर लौट आए हैं लेकिन कहीं नहीं मिला।"

चौधरी साहब ने  घर में बना हुआ चूल्हा आज ही हटवाया था कि कहीं शान में बट्टा न लग जाये,वही हुआ।

चौधरी साहब ने बहाना बनाते हुए कहा,"पण्डित जी आ गए हैं आप लोग रश्में निभाओ ,फिर बैठकर चाय पीते हैं।"

लड़की वालों ने सुन लिया था रामू की बातों को  इसलिए उनकी काना-फूसी शुरू हो गयी थी आपस में । बेटी वाला भी चिंतित हुआ कि इतने बड़े आदमी है एक सिलेंडर नहीं। 

लड़की के पिता ने कहा कोई बात नहीं रश्में भी हो जाएंगी पहले चाय ही पी लेते है। अब बेचारे चौधरी साहब का मुँह देखने लायक था। अभी तक जो बड़ी बड़ी डींगें हांक रहे थे एक दम बोलती बंद हो गयी थी। लेकिन फिर भी नकली मुस्कान लाते हुए कहा ,"भाई बाजार गया है आता ही होगा सिलेंडर लेने तब तक आगे की कार्यवाही करते हैं।"

लेकिन आज लड़की वाले भी मन बनाकर बैठ गए कि जिस घर में एक सिलेण्डर नहीं ऐसे घर में बेटी को नहीं करेंगे।

वे खड़े हुए और अपने  साथ आये हुए लोगों से बोले,"चलो यहाँ रिश्ता करने से क्या फायदा जिस घर में एक सिलेंडर नहीं "। साथ  में आये हुए सभी ने हाँ में सिर हिलाया और उठकर चलने लगे।

चौधरी साहब ने बहुत कोशिश की मनाने की लेकिन सब व्यर्थ। लड़की वाले चले गए।  

बेचारे चौधरी साहब जो अब तक मूंछों पर ताव दे रहे थे वे मूँछे स्वतः नीचे हो गयीं, आज एक सिलेंडर ने चौधरी साहब की नाक कटवा दी।


- डॉ राजीव कुमार पाण्डेय

कवि,कथाकार, व्यंगकार

वेवसिटी, गाजियाबाद

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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