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युगों-युगों से कल्याणकारी है 'राम' नाम, दो अक्षरों में समाया है ब्रह्मांड का सार: स्वामी ओंकारानंद सरस्वती


 युगों-युगों से कल्याणकारी है 'राम' नाम, दो अक्षरों में समाया है ब्रह्मांड का सार: स्वामी ओंकारानंद सरस्वती

श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत 63वें वर्ष में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ

इटारसी। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में 'राम' नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक महामंत्र है। आदिकाल से ही संतों, ऋषियों और कवियों ने राम नाम की महिमा का गुणगान किया है। वर्तमान समय के भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए राम नाम की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उक्त उद्गार श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के प्रारंभ दिवस चैत्र नवरात्र प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा के अवसर पर श्रीमद प्रयागपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज ने मुखारविंद से व्यक्त किए। प्रथम दिवस की कथा में व्यासपीठ से महाराज श्री ने श्रीराम नाम की महिमा का बखान किया।

कथा प्रारंभ दिवस पर आयोजन समिति अध्यक्ष नीरज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक, उपाध्यक्ष विष्णु शंकर पांडे, सचिव अभिषेक तिवारी, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र दुबे, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सह कोषाध्यक्ष अमित सेठ, संजीव अग्रवाल (दीपू), एमएल गौर, सहित सभापति मनजीत कलोसिया, संतोष राजवंशी, योगेश चावरे, विनोद बारसे, प्रधान आदिवासी समाज संगठन के अध्यक्ष बदामी लाल ऊईके, पंकज ककोड़िया, रामदास योना, संजय युवने, कुशवाह समाज के धनराज कुशवाह, मनोहर कुशवाह, दीनदयाल कुशवाह, ममता मालवीय, साधना योगी, सीमा कुशवाह, संध्या सराठे एवं समिति पदाधिकारियों ने व्यासपीठ का पूजन एवं महाराज श्री का स्वागत किया। व्यासपीठ से संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि ​शास्त्रों के अनुसार, 'राम' नाम की महिमा स्वयं महादेव शिव भी गाते हैं।पौराणिक मान्यता है कि काशी में देह त्यागने वाले प्राणी के कान में भगवान शंकर 'तारक मंत्र' के रूप में राम नाम ही सुनाते हैं, जिससे जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में स्पष्ट लिखा है: ​"कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।" अर्थात कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही मोक्ष का आधार है।

समिति प्रवक्ता भूपेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि  आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एवं संरक्षक प्रमोद पगारे के मार्गदर्शन में आयोजन के चलते विशेष मंदिर परिसर को विशेष साज-सज्जा एवं विद्युत रोशनी से सजाया गया है। आयोजन अंतर्गत समिति द्वारा 1963 से प्रतिवर्ष श्री रामकथा का आयोजन एवं रामनवमी पर शोभायात्रा चल समारोह की परंपरा रही है।

आयोजन समिति पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने नगर के धर्मप्रेमी नागरिकों से प्रतिदिन सायंकाल 7 बजे से श्रीराम कथा श्रवण करने पधारने हेतु आग्रह किया है। कथा में प्रतिदिन शीतल पेय एवं खाद्य पदार्थ के साथ प्रसादी वितरण की जाएगी।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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