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काव्य : नीयत बदल गई - उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट,बरेली


 

काव्य : 

नीयत बदल गई


पड़ा ट्रंप कमजोर हाथ से

बाजी फिसल गई। 


लोकतंत्र की कुटिल शाख पर

बैठा जब से उल्लू

समझ रहा था खुद को हिटलर 

बाबा जी का ठुल्लू

आज हेकड़ी उसकी सारी

रण में निकल गई। 


जमीं ऊपरी माले पर जब

कहीं दर्प की काई

सत्य- अहिंसा के सपनों की

उसने वाट लगाई

लोभ- लालसा जाने कितने

जीवन निगल गई।


सनकीपन की  सोच धकेले

विश्व युद्ध के कन्ने

खोल रही है अर्थव्यवस्था

दर्द भरे अब पन्ने

होर्मोज पर जिसकी सत्ता 

सौदे कुचल गई।


मदद माँगता अवसरवादी 

स्रोतों से वाशिंगटन

करो- मरो की तोप अचानक  

करती खूनी नर्तन

आस्तीन के साँपों की अब

केंचुल उचल गई।


छोड़ हाय नाटो की उँगली

कहता था दिल रूसी

लोमड़ियों ने आज फाँस ली

क्यों अमेरिकन पूसी

चढ़ा झाड़ पर अपनों की अब

नीयत बदल गई। 


 -  उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट

 'कुमुद- निवास', बरेली (उत्तर प्रदेश)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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