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काव्य : युद्ध की विभीषिका पर, विनती करते..रोते बच्चे - इंजी. अरुण कुमार जैन , फरीदाबाद


 काव्य : 

युद्ध की विभीषिका पर,

   विनती करते..रोते बच्चे.

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इंजी. अरुण कुमार जैन 

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अभी अभी हम बढ़े हुये हैं, बच्चे जग के कहलाते,

नन्हे -नन्हे पैर हमारे,

 ढंग से भी न चल पाते.

कभी पार्क में माँ,पापा संग,

 हम नित खेला करते थे,

हँसते गाते, मस्ती करते,

आगे बढ़ते रहते थे.

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तुमने बरसाए नित गोले,

राकेट, मिसाइल दागीं हैं,

इतनीआग लगायी जग में,

धरती, नर्क बना दी है.

धुंवा धरा पर और गगन में

ज़हर भर गया, इस जग में

हँसती, मुस्काती ये बगिया

शमशान सी सूनी पल भर में.

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रो रोकर हम बिलख रहे हैं

साँसे अटक गयीं सबकीं,

माँ पापा भी बिछड़ गये हैं,

नहीं सहारा अब कोई.

सपने प्यारे हम सब ने भी,

परियों संग के देखे थे,

 इस दुनियाँ को सुरभित करने,

मन में कुछ मंसूबे थे.

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मार काट हत्या प्रहार से,

डरे हुये हम, सहमे हैं,

किलकारी भरते बच्चे अब

रोते और सिसकते हैं.

ईश्वर,अल्लाह, प्रभु, जिनेश्वर,

वाहे गुरु तो हो सबके,

फिर क्यों कुछ सनकी पगलों से,

डरे हुये हो, प्रभु सबके?

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विनती करते, रोते बच्चे,

इनके प्राण बचा लो तुम,

लाखों मासूमों के मन से,

भय, संहार मिटा दो तुम.

शक्तिमान हो,पापी,कपटी 

दुष्टों का संहार करो,

जो तेरे प्यारे हैं प्रभु जी,

उनका बेड़ा पार करो.

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स्वप्निल सा संसार हमारा,

सारी खुशियाँ लौटा दो,

प्रेम, नेह,अनुराग,प्रगति की,सुखद बयार यहाँ ला दो.

दरिंदगी जो करते भू पर,

उनको सख्त सज़ा तुम दो

नाश करा कर सब कुछ उनका, बच्चे भी संग मरवा दो.

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जार जार आँसू रोयेंगे, उजड़ेगा उनका संसार,

पीर वेदना दुखद सभी को,दुखद सभी को है संहार.

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संपर्क //अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88

फ़रीदाबाद, हरियाणा, मो. 7999469175

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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