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जया आर्या की संस्मरण कृति “मेरा आसमान” लोकार्पित और विमर्श


 

जया आर्या की संस्मरण कृति “मेरा आसमान” लोकार्पित और विमर्श

जया आर्या जी के व्यक्तित्व में जो बचपन सुरक्षित है वही इनका लेखिका के रूप में इनकी दूसरी पारी की सफलता का राज है - सुरेश पटवा

रेडियो उद्घोषिका के रूप में लंबी सेवा के बाद एक लेखिका के रूप में स्थापित होना जया आर्या जी की एक बड़ी उपलब्धि है - गोकुल सोनी

भोपाल । बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र के तत्वाधान में जया आर्या के संस्मरण संग्रह “मेरा आसमान” का लोकार्पण एवं पुस्तक विमर्श समारोह प्रबुद्ध साहित्यकार सुरेश पटवा और वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों को संबोधित करते हुए सुरेश पटवा ने कहा कि “अब जबकि भारत में  औसत आयु 72 वर्ष से ऊपर पहुंच गई है तब लोग दूसरी पारी की सफलता का जश्न मनाने लगे हैं। जया आर्या जी ने 77 वर्ष की उम्र में पाँच किताबें लिखकर दूसरी पारी की महत्ता प्रतिपादित की है।”

गोकुल सोनी ने जया जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी साहित्यिक उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया एवं कहा कि जया आर्य के पास भावनाओं एवं स्मृतियों का खजाना है, वे जो लिखती हैं दिल से लिखती हैं।” श्री वी के श्रीवास्तव ने पुस्तक पर विचार रखते हुई कहा कि “लेखिका ने स्मृति से बहुत विस्तृत और अनोखे संस्मरण इस किताब में पिरोए हैं, जिनको पढ़कर इनके विशाल अनुभव की झलक मिलती है।”

     शोध केंद्र के निदेशक महेश सक्सेना ने जया जी के व्यक्तित्व का विश्लेषण करते हुई सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर दिव्यांग फाल्गुनी मिश्रा ने मनमोहक भजन प्रस्तुत किया। इसी अवसर पर विवेक रंजन श्रीवास्तव को उनकी की नाट्य कृति “जलनाद” को अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संस्थान द्वारा उन्हें प्रदत्त “नंदन नंदनी नाट्य सम्मान” से अलंकृत किया था। 

     कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध संयोजक एवं सफल उद्घोषक विमल भंडारी ने किया और आभार प्रदर्शन डाक्टर गिरिजेश सक्सेना ने किया। इस अवसर पर अशोक निर्मल, मनोज जैन मधुर, बी एल गोहिया जी, मधुलता शर्मा, मंजु पटवा जी, मृदुल त्यागी, शारदा दयाल श्रीवास्तव, विपिन बिहारी बाजपेयी, श्रीराम माहेश्वरी, और अन्य अनेकों गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे। 

महेश सक्सेना 

बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र

भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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