रुक्मणी देवी राव स्मृति सम्मान से 6 साहित्यकार सम्मानित
सम्मान समारोह एवं कविता पाठ सम्मान
इंदौर। स्व: रुक्मणी देवी स्मृति वेलफेयर सोसायटी के तत्त्वावधान में आयोजित स्मृति सम्मान समारोह एवं कविता पाठ मंगलवार को अहिल्या पुस्तकालय संगोष्ठी कक्ष में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रेस क्लब के महासचिव प्रदीप जोशी व अध्यक्षता आशु कवि प्रदीप नवीन ने की। विशेष आतिथ्य प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय त्रिपाठी रहे।
माँ रुक्मणि देवी
अतिथि स्वागत हरेराम वाजपेयी, संतोष मोहंती, डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', मुकेश तिवारी ने किया। शब्द स्वागत संस्थापक डॉ. अखिलेश राव ने किया व संचालन डॉ. आरती दुबे ने किया।
सम्मानित साहित्यकारों में वरिष्ठ कवि शिशिर उपाध्याय, अरुण अपेक्षित, डॉ. पंकज जैन, कीर्ति मेहता कोमल, कल्याणी गुप्ता 'कृति', स्वाति सिंह राठौर साहिबा को अतिथियों ने सम्मानित किया।
कवि सम्मेलन में कीर्ति मेहता 'कोमल' ने सुनाया कि 'चेहरे पर गंगा का पानी दिखता था, अंदर अंदर रिश्ते सूखे दरिया थे।सच की कीमत देखी मैने कोड़ी सी, झूठे सिक्के बाजारों में बढ़िया थे।'
डॉ. पंकज जैन ने 'अब तो इनको पुण्य में बदलो, जो पाप किए गंभीर, दाता से यह दुआ करो कि बरसे रिमझीम नीर।'
कल्याणी गुप्ता ने कविता 'माँ अक्सर भूल जाती है, रोज़ अपने हिस्से की बादाम भिगोना, घुटनों के दर्द की दवाई लेना, तीज त्यौहार पर सजना संवारना।'
शिशिर उपाध्याय ने 'सावन में हाथों में बंधता सूत सुनहरा याद आता है, जब भी अच्छा काम करूँ, माँ का चेहरा याद आता है' कविता पढ़ी।
स्वाति सिंह राठौर ने 'मरते दम तक होठों पर बस वंदेमातरम गान रहें' कविता का पाठ किया। अरुण अपेक्षित ने अध्यक्षीय काव्य पाठ में 'सद्बुद्धि दे, सद्ज्ञान दे, सरल प्रवृत्ति दें। महाशक्ति तू सर्वहिताय अपनी शक्ति दें' कविता का पाठ किया।
मुख्य अतिथि प्रदीप जोशी ने संबोधित करते हुए कहा कि 'माँ ने ही सिखाया की प्रकृति भी माँ है और यह भाव ही साहित्य की भावभूमि है।'
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रदीप नवीन ने आशु कविता के माध्यम से अपना संबोधन दिया व संजय त्रिपाठी ने सोसायटी को बधाई दी।
स्व: रुक्मणी देवी रॉय की स्मृति में अतिथियों ने परिसर में वृक्षारोपण किया।
आयोजन में सुब्रतो रॉय दिनेश दवे, भरत कुमार उपाध्याय, दिनेश दवे आदि सुधि साहित्यकार मौजूद रहे।
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