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काव्य : आधार है वह सृष्टि का - देवेन्द्र कुमार रावत, भोपाल


 

काव्य : 

आधार है वह सृष्टि का


तुम आकाश हो,

तो वह धरा है। 

तुम्हारें शून्य का अनंत

विस्तार है..

तो सृजनकर्ता ने

भूमि में सारा वैभव

भरा है।

तुम उर्ध्वाधर हो 

तो वह तुम्हारे लिए 

समानान्तर है। 

पर एक बड़ा अंतर है। 

कि तुम असीम 

होते हुए भी, 

जितने ऊँचे हो,।

उसकी ससीमता में

उतने ही नीचे हो 

तुम्हारा अभीष्ट है। 

निर्गुण निराकार,

यह उसे भी देती है आकार। 

आधार है वह सृष्टि का।

नहीं होती वह, 

तो क्या अर्थ रह जाता 

तुम्हारी वृष्टि का। 

यह सही है कि 

तुम सूरज की तपन 

सहते हो, 

वह मौन रहकर भी 

तप करती है।

करती है वह स्वागत हर आगत,

और बसंत का

उसकी दृष्टि में सम महत्व है,

ऋतुराज और संत  का  

ये अदभुत समन्वय केवल उसमें, ही 

दिखता है। 

इसलिए कवि अपने 

महाकाव्य में उसका नाम 

माँ ही लिखता है।    


 -   देवेन्द्र कुमार रावत

 संपादक तुलसी मानस भारती भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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