काव्य :
हे नारी !
कितने रंगों से रचता तुमको
हे नारी !तुमको कलाकार
अनुपम आभा,अतुलनीय
भरता, बहुविधि वो खेवनहार
रूप,रंग,रचता,रुचि से
भरता,भावना का भंडार
मन मे मोहक मृदुता मढ़ता
अंतस करता,करुणा अवतार
सर्जक,शोभित ,श्रृंगार सजा
महिमामय माँ तुमको रचता
सजनी,सृजनी ,बहिना, भाभी
रूप दे,करता धरती का उपकार
शक्ति स्वरूपा तुम्हे बनाता
सौंदर्य कूट कूट भरता
नख शिख से अंतस मन तक
भरता जननी वो तुममे प्यार
स्नेह,प्रेम ,सौंदर्य सजी
करुणा,क्षमा और त्याग पगी
हे नारी!जीवन तुम से है
हे नारी,ब्रज,जीवन तुम में है
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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