जंतर मंतर के आंदोलन से केंद्र सरकार ने छात्र शक्ति के महत्व को स्वीकार किया - केंद्रीय शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र देर से उठाया सही कदम
दशपुर वैचारिक निवेश विचार गोष्ठी में वक्ताओं के विमर्श का निष्कर्ष
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर सरकार द्वारा जो कदम उठाए गए वह देर से उठाए गए सही कदम कहे जा सकते हैं। इस आंदोलन से देश में छात्र शक्ति के महत्व को समझा गया है और हमारे देश की छात्र शक्ति के भी सकारात्मक भाव सामने आए हैं। कुछ ताकतों ने यह सोचा होगा कि "जेन जी" के नाम से भारत में भी नेपाल श्रीलंका और बांग्लादेश की तरह सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन होगा उन्हें भी छात्र शक्ति ने जवाब दे दिया है।
यह विचार नगर के प्रबुद्ध वर्ग के प्रतिनिधियों ने "वैचारिक निवेश" विमर्श संगोष्ठी में व्यक्त किए।
विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी गुरुचरण बग्गा ने कहा किसी भी मसले का समाधान केवल कानून ही नहीं होता हमारे अंदर की नैतिकता सबसे ज्यादा निर्णायक होती है।यह अच्छी बात है कि हाल ही के छात्र आंदोलन से देश की युवा शक्ति जागृत हुई है और युवाओं के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है जो एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए।
श्री बग्गा ने कहा कि जड़ता खत्म कर सरकार और युवाओं में संवाद हुआ और परिणाम सामने आए हैं।
निश्चित ही केंद्र सरकार द्वारा आने वाले समय में समाज और राष्ट्र हित में अच्छे निर्णय लिए जाएंगे ।
पूर्व न्यायाधीश श्री रघुवीर सिंह चुंडावत ने कहा कि देश में नीट परीक्षा के पेपर लीक होना एक बहुत ही दुर्भाग्य जनक अप्रिय प्रसंग रहा है सरकार ने इसके लिए तीन फास्ट्रेक कोर्ट का प्रावधान कर तीन माह में इस पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट करने का भी दृढ़ निश्चय किया है। यह बहुत ही ठोस कार्यवाही साबित हो सकती है। हर परीक्षा में अब पेपर लीक जैसे मामले को कोई हल्के में नहीं लेगा। श्री चुंडावत ने कहा कि इस पूरे मामले ने छात्रों के पक्ष को सही तरीके से समझा गया है इसमें कतिपय राजनेतिक दलों ने राजनीति करने का प्रयास किया किंतु वे विफल रहे।
जन परिषद अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल ने कहा कि हमारे देश के 18 वर्ष से 28 वर्ष तक की युवा पीढ़ी ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में यह तीखा आंदोलन कर कोई अपराध नहीं किया है। अब समय आ गया है कि हमारे देश को प्रयोगवादी दौर से बाहर निकाला जाए और ठोस धरातल पर निर्णय लिए जाएं हमारे देश का युवा पूरी दुनिया का आने वाला भविष्य है। उनकी शक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नोटिस में लिया है। रोजगार के मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए। युवा पीढ़ी कुंठा और नशे की गिरफ्त में जाए उसके पूर्व युवा वर्ग का विश्वास जीत कर राष्ट्र निर्माण में जोड़ना होगा ।
योग गुरु सुरेंद्र जैन ने कहा कि देश में अभी भी सख्त कानून और उनके पूर्णतया क्रियान्वयन की सख्त आवश्यकता है। पेपर लीक का मामला आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था के खोखलेपन को प्रदर्शित करता है। इस दिशा में कानून का पूरी सख्ती से पालन आवश्यक है। न्यायिक जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पेपर लीक कांड में कौन सी एजेंसी गुनाहगार है क्योंकि पेपर बनाना छापना,वितरण करना ये अलग अलग दायित्व हैं।
वरिष्ठ अभिभाषक गोपाल कृष्ण पाटिल ने कहा कि विगत कुछ वर्षों से देश को स्थिर करने की लगातार कोशिश की जा रही है नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को अनावश्यक तूल दिया गया। छात्रों की पीड़ा अपनी जगह स्वाभाविक है किंतु इस मुद्दे पर राजनीति करना दुर्भाग्य जनक है। आपने कहा की भीड़ भरे आंदोलन में अनुशासन का होना बहुत जरूरी है देश को सकारात्मक राजनीति की आवश्यकता है।
वरिष्ठ शिक्षाविद पूर्व प्राचार्य डॉ. रवींद्र कुमार सोहोनी ने कहा कि छात्रों के आंदोलन में यदि अनुशासन और नैतिकता हो तो वह हमेशा सफल होता है उसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। रोजगार, शिक्षा चिकित्सा इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारे देश में प्रयोग ज्यादा होते हैं। जन भावनाओं के अनुरूप योजनाओं के क्रियान्वयन में ब्यूरोक्रेट्स गुमराह करते हैं। आज देश को राष्ट्रीय चरित्र की आवश्यकता है।
शिक्षाविद ओर सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम भटनागर ने कहा कि विकृतियों के खिलाफ युवाओं का विद्रोह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है किंतु उसमें अनुशासन और सकारात्मक का भाव होना आवश्यक है। जल्द और शॉर्टकट तरीके से पैसे कमाने की जो दुष्प्रवृत्ति बढ़ी है उसी का दुष्परिणाम यह पेपर लीक जैसी घटनाएं हैं। नियम और कानून को बनाने के साथ उनका सही क्रियान्वयन हो इस हेतु प्रशिक्षण होना भी आवश्यक है
वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजेश जोशी ने कहा कि सरकारों को कभी जिद पर नहीं अड़ना चाहिए यह अच्छी बात है कि जिस तरह सरकार ने किसान आंदोलन के समय अपने कदम पीछे हटाए थे इस छात्र आंदोलन में भी ऐसा ही किया गया है। देश हित सर्वोपरि होना चाहिए। ज्यादा बेहतर होता यदि सरकार छात्रों से बहुत पहले ही बात कर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा करवा देती। सरकार ने देर से ही सही किंतु सही कदम उठाए हैं। देश को एक अनावश्यक अप्रिय स्थिति में जाने से रोका गया है। इस प्रकरण में अंततः सरकार और छात्रों दोनों ही पक्षों ने सकारात्मक रुख अपनाया जो देश हित में जरूरी था।
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