कहानी में आधुनिकता का भाव होना बहुत ज़रूरी है - संतोष श्रीवास्तव
भोपाल । अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच का एक अभिनव आयोजन, कहानी संवाद “दो कहानी- दो समीक्षक” का आयोजन किया गया।
इस अवसर अध्यक्षता कर रही अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष, संतोष श्रीवास्तव ने कहानी संवाद में पढ़ी गई दोनों कहानियों पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी व्यक्त करते हुए कहा कि -
“आज पढ़ी गई कहानियों में डॉ. विपिन पवार की कहानी, ‘आएगी वह एक दिन ज़रूर” एक प्रेम कहानी है जो हमें जहाँ अतीत में ले जाती है। वहीं डॉ. मोहम्मद आज़म की कहानी ‘फलक शिगाफ़ कहकहे’ (गगन भेदी अट्ठहास), हमें हंसने-हँसाने पर मजबूर करती है। आज पढ़ी गई दोनों कहानियाँ अपने आप में एक अलग ही कथानक लिए हुए थीं।
कई कहानियाँ पढ़ने में आती तो हैं लेकिन बहुत जल्द ही स्मृति पटल से गायब भी हो जाती हैं। कई कहानियाँ ऐसी भी होती हैं जो पाठक को उसमें डूबने पर मजबूर कर देती हैं और बहुत देर तक ज़हन में रहती हैं। कहानी में आधुनिकता का भाव होना बहुत ज़रूरी है।”
मुख्य अतिथि शकुंतला मित्तल ने डॉ. विपिन पवार की कहानी, ‘आएगी वह एक दिन ज़रूर” की समग्र विवेचना करते हुए कहा कि -
“माता-पिता को अपनी संतान का जीवन साथी चुनते समय सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं खड़ा करना चाहिए बल्कि उसकी भावनाओं के अनुरूप ही निर्णय लेना चाहिए। आज भी ऐसी घटनाएं सामने आ ही जाती हैं जहाँ माता-पिता का निर्णय अपनी ही संतान की परेशानी का सबब बनता है और आज्ञाकारी संतान उसे ज़िन्दगी भर झेलती है। कहानी पढ़कर दिल में एक कसक-सी होती है कि पचास साल के लम्बे इंतज़ार के बाद भी केकी को यक़ीन है कि नीलोफर आएगी ज़रूर।
कहानी में मंज़रकशी के दृश्य बहुत ही सजीव लगते हैं। भाषा-शैली और शिल्प बहुत ही सुन्दर है।”
विशिष्ट अतिथि डॉ. विनीता राहुरिकार ने डॉ. मोहम्मद आज़म की कहानी ‘फलक शिगाफ़ कहकहे’ (गगन भेदी अट्ठहास) की समीक्षा कुछ निराले ही अंदाज़ में की। उन्होंने कहा कि -
“इस कहानी ने छोटे से कलेवर में ही सब कुछ समेट लिया है। इस कहानी में 500 के नोट के बहाने किसी इंसान की अंदर की प्रवृत्ति के दर्शन होते हैं। उसके अंतर्द्वंद्व को कहानीकार ने बहुत ही सुन्दर तरीके से उभारा है। यह एक मनोवैज्ञानिक कहानी है। इसके क्लाइमेक्स में हास्य-व्यंग्य का पुट है। पाठक और श्रोता अपनी हंसी को रोक नहीं पाता।”
शेफालिका श्रीवास्तव ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि एक अच्छी कहानी पाठकों का दृष्टिकोण बदल सकती है। महिमा श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आभार केवल औपचारिकता ही नहीं है। यह कार्यक्रम का एक आवश्यक हिस्सा है जिसे अदा किया जाना ज़रूरी है। हम आपके मूल्यवान समय का सम्मान करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया।
कहानी संवाद के इस कार्यक्रम में डॉ. प्रमिला वर्मा, सूफ़िया खान, बीरेंद्र कुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
कहानी संवाद के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के, इस कार्यक्रम में देश-विदेश से अनेक साहित्यकार, कहानीकार, पत्रकार एवं कलाकार अंत तक मौजूद रहे।
प्रस्तुति - मुज़फ्फर सिद्दीकी
Tags:
साहित्यिक समाचार
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