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कक्षा आठवी के अनुभव एवं टीम ने इलेक्ट्रिक वाहन में आपातकालीन ऊर्जा पुनर्प्राप्ति पर प्रोजेक्ट बनाए


कक्षा आठवी के अनुभव एवं टीम ने इलेक्ट्रिक वाहन में आपातकालीन ऊर्जा पुनर्प्राप्ति पर प्रोजेक्ट बनाए

भोपाल । बच्चों के बीच नवाचार को बढ़ावा देने एवं विकसित भारत के सपनो को साकार करने के उद्देश्य से भोपाल विज्ञान मेला  का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता हैं। St. Montfort School  के कक्षा आठवी के *अनुभव एवं टीम को *Certificate of Excellence (Young Scientist Award)*
से भोपाल विज्ञान मेला 2026 में सम्मानित किया गया।
इसी करी को आगे बढ़ाने के प्रयास में टीम लीडर अनुभव अपने सहयोगी ध्रुव एवं भौमिक के साथ मिलकर कर  इलेक्ट्रिक वाहन में आपातकालीन ऊर्जा पुनर्प्राप्ति प्रोजेक्ट पर काम किया है।
कल्पना कीजिए कि आप एक इलेक्ट्रिक वाहन चला रहे हैं और अचानक उसकी बैटरी का स्तर बहुत कम हो जाता है। आप किसी ऐसे हाईवे पर हैं जहाँ आसपास कोई चार्जिंग स्टेशन भी उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में आपके मन में यह सवाल जरूर आ सकता है—क्या वाहन की गति और पहियों की गति का उपयोग करके कुछ विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है?

इसी विचार से हमारे प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई है। हमारे प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह दिखाना है कि वाहन की गति से उत्पन्न यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके आपातकालीन स्थिति में उसका उपयोग किया जा सकता है।
सामान्य रूप से एक इलेक्ट्रिक कार मुख्य बैटरी में संग्रहित विद्युत ऊर्जा का उपयोग करती है। यह विद्युत ऊर्जा मोटर को चलाती है और मोटर पहियों को घुमाकर वाहन को आगे बढ़ाती है। इस प्रक्रिया में विद्युत ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

हमारे प्रोजेक्ट में हमने वाहन के घूमते हुए पहियों को एक गियर मैकेनिज्म से जोड़ा है। जब पहिए घूमते हैं, तो गियर मैकेनिज्म उस घूर्णन गति को आगे एक जनरेटर तक पहुँचाता है। जनरेटर इस यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

इसके बाद उत्पन्न विद्युत ऊर्जा एक चार्जिंग सर्किट से होकर गुजरती है। यह सर्किट विद्युत ऊर्जा को एक आपातकालीन बैटरी में संग्रहित करने में सहायता करता है। इस बैटरी में संग्रहित ऊर्जा का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन चार्जिंग के लिए किया जा सकता है।

हमने अपने मॉडल में एक इंडिकेटर सिस्टम भी लगाया है। यह इंडिकेटर हमें यह समझने में सहायता करता है कि बिजली उत्पन्न हो रही है या नहीं और आपातकालीन बैटरी चार्ज हो चुकी है या नहीं।

हमारे प्रोजेक्ट का मुख्य सिद्धांत है:

यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा का संग्रहण

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हम ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) की अवधारणा को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य यह दिखाना है कि ऐसी ऊर्जा, जो सामान्य परिस्थितियों में उपयोगी रूप से संग्रहित नहीं हो पाती, उसे एक विशेष प्रणाली की सहायता से पुनः प्राप्त करके आपातकालीन उपयोग के लिए संग्रहित किया जा सकता है।

हालाँकि, वास्तविक इलेक्ट्रिक वाहनों में ऐसी प्रणाली को बहुत सावधानी से डिजाइन करना पड़ता है, क्योंकि ऊर्जा को दोबारा उत्पन्न करने की प्रक्रिया में वाहन की गति और दक्षता पर प्रभाव पड़ सकता है। हमारा मॉडल मुख्य रूप से इस वैज्ञानिक सिद्धांत और उसकी संभावित उपयोगिता को प्रदर्शित करता है।

इस परियोजना से हमें यह सीख मिलती है कि ऊर्जा को केवल उत्पन्न करना ही नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग, पुनर्प्राप्ति और संग्रहण भी महत्वपूर्ण है।

हमारा संदेश है:
“उपयोगी ऊर्जा को व्यर्थ न जाने दें—उसे पुनः प्राप्त करें, संग्रहित करें और जरूरत पड़ने पर उपयोग करें।”
हमारा प्रोजेक्ट ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा रूपांतरण और भविष्य की स्मार्ट इलेक्ट्रिक-वाहन तकनीक की दिशा में एक छोटा-सा प्रयास है।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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