भारत संचार निगम लिमिटेड के 26 वें स्थापना दिवस पर विराट कवि सम्मेलन हुआ
इटारसी । भारत संचार निगम द्वारा महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसएनएल इटारसी के महाप्रबंधक राजकुमार छानेना ने की तथा मुख्य अतिथि तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.मोहन तिवारी आनंद भोपाल थे।
कार्यक्रम का संयोजन बीएसएनएल इटारसी के सहायक महाप्रबंधक विपुल श्रीवास्तव थे।
मा सरस्वती के पूजन अर्चन के बाद मंचस्थ अतिथियों का पुष्पाहारों से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ, प्रसिद्ध लोकप्रिय गीत, " इतनी शक्ति हमें देना दाता " के सुस्वर गायन से किया गया, जिसे कार्यालय के ही मुकेश द्वारा अत्यंत मधुर एवम प्रभावशाली आवाज में प्रस्तुत किया गया।नर्मदापुरम से पधारी कवित्री मंगला केवट ने सरस्वती वंदना का पाठ कर कवि सम्मेलन का श्री गणेश किया-"नमन है, शारदे, मुझे वरदान देना माॅ"।
सर्वप्रथम भोपाल से आये वरिष्ठ कवि डा. शिव कुमार दीवान ने महंगाई तथा बेरोजगारी पर केंद्रित दोहों का पाठ किया। महेश मूलचंदानी ने अपनी व्यंग्यात्मक क्षणिकाएं सुनाकर भरपूर तालियां बटोरींएवम सुंदर गीत प्रस्तुत किया,
इटारसी । भारत संचार निगम द्वारा महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसएनएल इटारसी के महाप्रबंधक राजकुमार छानेना ने की तथा मुख्य अतिथि तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.मोहन तिवारी आनंद भोपाल थे।
कार्यक्रम का संयोजन बीएसएनएल इटारसी के सहायक महाप्रबंधक विपुल श्रीवास्तव थे।
मा सरस्वती के पूजन अर्चन के बाद मंचस्थ अतिथियों का पुष्पाहारों से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ, प्रसिद्ध लोकप्रिय गीत, " इतनी शक्ति हमें देना दाता " के सुस्वर गायन से किया गया, जिसे कार्यालय के ही मुकेश द्वारा अत्यंत मधुर एवम प्रभावशाली आवाज में प्रस्तुत किया गया।नर्मदापुरम से पधारी कवित्री मंगला केवट ने सरस्वती वंदना का पाठ कर कवि सम्मेलन का श्री गणेश किया-"नमन है, शारदे, मुझे वरदान देना माॅ"।
सर्वप्रथम भोपाल से आये वरिष्ठ कवि डा. शिव कुमार दीवान ने महंगाई तथा बेरोजगारी पर केंद्रित दोहों का पाठ किया। महेश मूलचंदानी ने अपनी व्यंग्यात्मक क्षणिकाएं सुनाकर भरपूर तालियां बटोरींएवम सुंदर गीत प्रस्तुत किया,
" मैं दुआ कमाने निकला हूॅ,
मैं दुआ कमाने निकला हूॅ"l
कवि सुनील भिलाला ने बुन्देली रचना आल्हा की तर्ज पर सुनाई एवं कविता
हिमांशु शर्मा ने चुटीले अंदाज में हास्य रचनाएं सुनाईं। जिद हमारी भी लव-कुश के जैसी है इसके आगे तो घोड़ा नहीं जाएगा।
आलोक शुक्ला अनूप ने कहा-हर तरफ नफरतों का अंधेरा ही अंधेरा है,
एक दीपक मुहब्बत का जलता रहे तो बुरा क्या है।
रामेश्वर यादव ने एक अनोखे अंदाज में कविता पाठ किया। इस अवसर पर उन्होंने एक कुशल आशुकवि की तरह समस्त सहभागी कवियों की रचनाओं को केन्द्रित कर काव्य पाठ किया। निराश मत होना, कभी निराश मत होना" ।
बीएसएनएल इटारसी के विनीत सिन्हा , उपमंडल अभियंता ने बी एस एन एल की कार्यप्रणाली पर विवरणात्मक कविता का पाठ किया। उन्होंने इसे उत्कृष्ट सेवा देने वाला पी एस यू बताते हुये कहा कि यह लोगों को दिलों से जोड़ने में विश्वास रखता है।
बीएसएनएल इटारसी के सहायक महाप्रबंधक विपुल श्रीवास्तव ने आध्यात्म से जुड़ी और मन को आनंदित करने वाली कविता जैसे समुद्र मंथन ( दूजा शिव फिर ना आया, सब हैं अमृत के रखवाले) एवं " दीप जलाकर जाना" ( मन के आंगन में शंख बजाकर यूं ही लौट न जाना) जैसी ओजस्वी कविताओं की प्रस्तुति दी और उन्होंने बी एस एन एल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लगन और मेहनत से किए गए कार्यों से राष्ट्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा.मोहन तिवारी आनंद ने अपने उद्बोधन में बीएस एनएल के महाप्रबंधक राजकुमार छानेना के सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के कृत्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विवेकशील अधिकारी के मार्गदर्शन में समस्त अधिकारी/कर्मचारी अपनी पूर्ण लगन और निष्ठा के साथ साथ कार्य कर नये नये कीर्तिमान सृजित करते हैं।
डा.आनंद ने कुछ मुक्तक, दोहों के साथ एक गीत का पाठ किया।
बीएसएनएल के महाप्रबंधक छानेना ने सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने सहभागी कवियों के द्वारा सुनाई गईं रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए सराहना करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद से अधिक सफल कवि सम्मेलन को सुनकर अपार खुशी का अनुभव हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की बीएसएनएल के अधिकारी/कर्मचारी अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के साथ साथ साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं यह उल्लेखनीय और प्रशंसनीय भी है। इस सफल कार्यक्रम ने मुझे भी सक्रियता के साथ इस तरह के कार्यों में सहभागिता की प्रेरणा दी है।
अंत में विपुल श्रीवास्तव ने सभी कवियों तथा उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा सामूहिक स्वरुचि भोज के बाद कार्यक्रम संपन्न होने की विधिवत घोषणा की गई।
कवि सुनील भिलाला ने बुन्देली रचना आल्हा की तर्ज पर सुनाई एवं कविता
हिमांशु शर्मा ने चुटीले अंदाज में हास्य रचनाएं सुनाईं। जिद हमारी भी लव-कुश के जैसी है इसके आगे तो घोड़ा नहीं जाएगा।
आलोक शुक्ला अनूप ने कहा-हर तरफ नफरतों का अंधेरा ही अंधेरा है,
एक दीपक मुहब्बत का जलता रहे तो बुरा क्या है।
रामेश्वर यादव ने एक अनोखे अंदाज में कविता पाठ किया। इस अवसर पर उन्होंने एक कुशल आशुकवि की तरह समस्त सहभागी कवियों की रचनाओं को केन्द्रित कर काव्य पाठ किया। निराश मत होना, कभी निराश मत होना" ।
बीएसएनएल इटारसी के विनीत सिन्हा , उपमंडल अभियंता ने बी एस एन एल की कार्यप्रणाली पर विवरणात्मक कविता का पाठ किया। उन्होंने इसे उत्कृष्ट सेवा देने वाला पी एस यू बताते हुये कहा कि यह लोगों को दिलों से जोड़ने में विश्वास रखता है।
बीएसएनएल इटारसी के सहायक महाप्रबंधक विपुल श्रीवास्तव ने आध्यात्म से जुड़ी और मन को आनंदित करने वाली कविता जैसे समुद्र मंथन ( दूजा शिव फिर ना आया, सब हैं अमृत के रखवाले) एवं " दीप जलाकर जाना" ( मन के आंगन में शंख बजाकर यूं ही लौट न जाना) जैसी ओजस्वी कविताओं की प्रस्तुति दी और उन्होंने बी एस एन एल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लगन और मेहनत से किए गए कार्यों से राष्ट्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा.मोहन तिवारी आनंद ने अपने उद्बोधन में बीएस एनएल के महाप्रबंधक राजकुमार छानेना के सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के कृत्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विवेकशील अधिकारी के मार्गदर्शन में समस्त अधिकारी/कर्मचारी अपनी पूर्ण लगन और निष्ठा के साथ साथ कार्य कर नये नये कीर्तिमान सृजित करते हैं।
डा.आनंद ने कुछ मुक्तक, दोहों के साथ एक गीत का पाठ किया।
बीएसएनएल के महाप्रबंधक छानेना ने सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने सहभागी कवियों के द्वारा सुनाई गईं रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए सराहना करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद से अधिक सफल कवि सम्मेलन को सुनकर अपार खुशी का अनुभव हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की बीएसएनएल के अधिकारी/कर्मचारी अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के साथ साथ साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं यह उल्लेखनीय और प्रशंसनीय भी है। इस सफल कार्यक्रम ने मुझे भी सक्रियता के साथ इस तरह के कार्यों में सहभागिता की प्रेरणा दी है।
अंत में विपुल श्रीवास्तव ने सभी कवियों तथा उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा सामूहिक स्वरुचि भोज के बाद कार्यक्रम संपन्न होने की विधिवत घोषणा की गई।
Tags:
साहित्यिक समाचार
